ललितपुर। परम शिव विज्ञान संस्थान पाली नीलकंठेश्वर द्वारा कबीर की हरि भक्ति पर एक सेमिनार का आयोजन रविवार को श्रीजगदीश मंदिर में आयोजित किया गया, जिसमें वक्ताओं ने कबीर की हरि भक्ति पर अपने मंतव्य रखे। प्रो.बिहारी लाल बबेले ने कहा कि मध्य युगीन इतिहास के कबीर एक महान समाज सुधारक व आध्यात्मिक सत्यानु संधानी संत पुरुष रहे। कबीर के एक दोहे ने उन्हें अपने व्यक्तिव को उस हरि भगवान से इतना अधिक जोड़ दिया कि भगवान भी उनके मुरीद हो गए थे। संत तीर्थ कबीर ने समाज में व्याप्त रुढ़िवाद व कट्टरपंथ का अत्यधिक विरोध किया। माना जाता है और हिंदू धर्म में पक्का विश्वास भी है कि काशी में दिवंगत होने पर मुक्ति प्राप्त करता है तो इस रुढ़ि को तोड़ने को काशी से मगहर गए और उन्होंने वर्ष 1558 में वहां उनकी मृत्यु हो गई थी। ओशो उन्हें महान क्रांतिकारी मानते थे। समाजवादी चिंतक राजेंद्ररजक ने कहा कि करीब विश्व के सबसे बड़े समाज सुधारक थे। गांधी और कबीर में कोई फर्क नहीं था। डा.जनक किशोरी शर्मा, पंवन शास्त्री, प्रो.भगवत नारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर डा.अमरचंद जैन, फूलचंद रजक, रवि चुनगी, अशोक निधान पांडे, गोपीचंद डोडवानी, रवींद्र पाठक, प्रेमशंकर गुप्ता, महेंद्र रजक, राकेश बबेले, पुष्पा हुंडैत, आदर्श कांत हुंडैत, रानी पुरोहित, उमा चौबे, बृजमोहन संज्ञा, हरीबाबू शर्मा आदि उपस्थित रहे।