कायाकल्प के नाम गड़बड़ी, जांच में घिरी कार्यदायी संस्था
तीन सदस्यीय जांच में हुई कई कमियां उजागर
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सुम्मेरा तालाब के सौंदर्यीकरण को शासन से अवमुक्त हुई धनराशि के इस्तेेमाल में जमकर खेल हुआ है, न केवल तालाब को संवारने के लिए आए पैसा में भी गड़बड़ी की गई है। बंदरगुढ़ा में वीआईपी गेस्ट हाउस और बोट क्लब की स्थापना के पैसे में भी धांधली हुई है। इसका खुलासा तीन सदस्यीय जांच समिति की आख्या से हुआ है। समिति ने लाखों रुपये की क्षति दर्शाते हुए अपनी जांच रिपोर्ट डीएम के समक्ष प्रस्तुत कर दी है, जिससे कार्यदायी संस्था में खलबली मची हुई है।
शहर के सुम्मेरा तालाब से नगरवासियों की आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। यहां महिलाएं कार्तिक स्नान सहित कई धार्मिक आयोजनों में भाग लेती हैं, तो डोल ग्यारस पर भगवान विहार होता है। बीते वर्षाें में शासन की ओर से सुम्मेरा तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 424.77 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई थी। इसके निर्माण की जिम्मेदारी यूपी पीसीएल यूनिट बांदा को दी गई। इस संस्था ने वर्ष 2014 में इसका प्राक्कलन तैयार किया। इसमें चहारदीवारी निर्माण सहित विभिन्न कार्यों को वर्ष 2015 में पूर्ण होना दर्शाया। इस संस्था ने तालाब पर गुणवत्ताहीन कार्य कराए। इसकी शिकायतें शासन एवं प्रशासन स्तर की गई, जिसके मद्देनजर डीएम मानवेंद्र सिंह ने जांच बैठाते हुए एडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी थी। इसमें डीआरडीए के सहायक अभियंता भागीरथ चतुर्वेदी व अवर अभियंता वीके श्रीवास्तव को शामिल किया गया। समिति के सदस्यों ने सबसे पहले 11 सौ मीटर की चहारदीवारी के निर्माण की जांच की। इसमें नींव के नीचे काली कपासी मिट्टी होने के बावजूद नींव का पूर्ण रूपेण ट्रीटमेंट नहीं कराया। जिस कारण चहारदीवारी में क्रैक्स आ गए। चहारदीवारी पर एस्टीमेट के हिसाब से 1,66,20,319 रुपये के सापेक्ष लागत का दस प्रतिशत यानी 16,62,031 रुपये क्षति पाई गई। पाथवे का निर्माण चौदह सौ मीटर में कराया गया। जिसका प्राक्कलन लागत 60,62,116 रुपये के सापेक्ष पंद्रह प्रतिशत 9,09 लाख रुपये की क्षति पाई गई। पूरे पाथवे पर लंबवत एवं आधारवत क्रैक्स आ गए हैं। तीन घाटों का निर्माण कराया गया है। इसमें 10,13,941 लाख रुपये के सापेक्ष 20 प्रतिशत यानि दो लाख रुपये की क्षति पाई गई। घाटों में छोटे व बड़े क्रैक्स आ गए हैं तो घाट की सीढ़ियां पर जगह-जगह प्लास्टर उखड़ रहा है। पाथवे के तालाब साइड स्लोप पर ग्राउटेड पिचिंग कई जगह धस गई है। पिचिंग के खाली स्थानों में बालू भराई का कार्य ठीक प्रकार से नहीं किया गया है। कई स्थानों पर कच्चे पत्थरों का उपयोग किया गया है जो मानक विपरीत है। इसमें 120 लाख रुपये के सापेक्ष बीस प्रतिशत यानि 24 लाख रुपये की क्षति पाई गई है। चबूतरा निर्माण में मानक विपरीत काम पाया गया है। इसमें 50 लाख के मुकाबले बीस प्रतिशत यानि 4 लाख रुपये की क्षति पाई गई है। इसी प्रकार बंदरगुढ़ा जाखलौन में वीआईपी गेस्ट हाउस एवं बोट क्लब की स्थापना के लिए 245.35 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त हुई। वीआईपी गेस्ट हाउस का निर्माण, चेंज रूम का निर्माण, पार्क, पथवे, पक्का फ्लोर एवं पानी की निकासी के लिए नाली निर्माण पर 81.39 लाख रुपये की लागत आई। निर्मित भवन की छतों में सीलिंग से पानी रिसावट के निशान पाए गए। हॉल की दीवालों में सीलन के चलते पुट्टी उखड़ गई। एप्रिन के पास पानी की निकासी के लिए नाली में दरारें पड़ गई। मेन गेट के पास पथवे पर एप्रिन चटक गई है। इस निर्माण की लागत का बीस प्रतिशत यानि 16,27,800 रुपये की क्षति पाई गई है। बेतवा नदी के घाट पर सीढ़ियों का निर्माण 15.04 लाख रुपये में कराया गया है। निर्मित सीढ़ियों के जोड़ खुल गए हैं। सपोर्ट वाल पर भी हल्के क्रैक्स आ गए हैं। करीब बीस सीढ़ियों के पत्थर चटक गए हैं। इसमें लागत के सापेक्ष बीस प्रतिशत की क्षति पाई गई है। ओपिन शेड व पेड़ों के चबूतरों का निर्माण 5.49 लाख रुपये में किया गया। जिसके सापेक्ष बीस प्रतिशत क्षति पाई गई है। ओपिन शेड की छत टूट गई है तो पेड़ों के चबूतरे फट गए हैं। वीआईपी गेस्ट हाउस से घाट तक पेवर रोड का निर्माण 12.88 लाख में किया गया है। इससे पेवर ब्रिक्स लगाए गए हैं जो बहुत ही घटिया गुणवत्ता के हैं। बेसमेंट कमजोर हैं। यहां के पेवर ब्रिक्स धंस गए हैं। इसमें कार्य की लागत का 2,57, 600 रुपये की क्षति पाई गई है। गठित समिति ने जांच पूरी कर डीएम मानवेंद्र सिंह को रिपोर्ट सौंप है। इसके कारण अब कार्यदायी संस्था पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। अधिकारियों का कहना है कि इस पर कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाएगा।
अब सौंदर्यीकरण के लिए नपा ने कसी कमर
तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए नगर पालिका ने कमर कसी है। इसकी शुरुआत में तालाब की खुदाई का काम कराया जा रहा है। आने वाले समय में अन्य कार्य भी होंगे। जिसकी कार्ययोजना तैयार कराई जा रही है।