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पंडवन में पर्यटन की अपार संभावनाएं, संसाधनों की कमी

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पंडवन में पर्यटन की अपार संभावनाएं, संसाधनों की कमी
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ललितपुर।
नाराहट क्षेत्र में ग्राम पारौल से करीब पांच किलोमीटर दूरी पर विंध्यांचल पर्वत शृंखला पर स्थित तीर्थ क्षेत्र पंडवन में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यहां संसाधनों की कमी के कारण यह विश्व पर्यटन पर अपनी पहचान पाने के लिए मोहताज हैं। संसाधनों की कमी के कारण इस प्राचीन स्थल तक पर्यटकों को पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना होता है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन भेजा है, जिसमें पंडवन को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग की है।
जिले में प्राचीन स्मारकों, पुरास्थलों, प्राचीन धार्मिक स्थलों, विश्व प्रसिद्ध मंदिरों की भरमार हैं। नाराहट क्षेत्र में ग्राम डोंगराखुर्द होते हुए ग्राम पारौल से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों व ककरीली, पथरीली रोड से सैकड़ों फीट ऊंचाई पर विंध्याचल की पहाड़ी पर धार्मिक पंडवन स्थल है। जहां मान्यता है कि यहां अपने अज्ञातवास के दौरान पांडव द्रोपदी के संग ठहरे थे और उन्हीं के शिवलिंग रूपी प्रतीक जामनी नदी के तट पर सैकड़ों फीट ऊंचाई पर स्थित हैं। इस पहाड़ी से आसपास स्थित विंध्यांचल पर्वत शृंखला की पहाड़ियां आसानी से देखी जा सकती है, जबकि बारिश के दिनों में तो जामनी नदी और आसपास के जंगलों का ऊंचाई से दिखने वाला यह मनोहारी दृश्य देखते ही बनता है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए आसपास के ग्रामीणों को ही काफी परेशानी होती है। तो ऐसे में जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों व सैलानियों को पहुंचने के लिए तो और भी अधिक दिक्कतें होती हैं। पंडवन तक पहुंचने के लिए न तो कोई वाहन साधन ही उपलब्ध होता है और न ही यहां तक पहुंचने के लिए सड़क व्यवस्था ही बहुत अच्छी है। यहां तक के लिए पंडुवन में बिजली, पानी की तो दूर-दूर तक व्यवस्था का भी अभाव है। यहां पहाड़ी पर स्थित मंदिर के पास एक हैंडपंप जरूर लगा है, जिससे पानी नहीं निकलता है। इसी पहाड़ी पर ही एक हनुमान मंदिर भी है, जिसमें धर्मशाला तो बनाई गई है, लेकिन जहां यज्ञ आदि होने के दौरान संत आदि रुकते हैं। यहां हर वर्ष बड़े स्तर में धार्मिक मेला का आयोजन होता है, जिस दौरान स्थानीय नागरिकों व मंदिर समिति के लोग यहां व्यवस्थाएं करते हैं। लेकिन शाम होने पर लोगों को वापस लौटना होता है। यहां तक पहुंचने के लिए मुख्यालय से करीब अस्सी किलोमीटर दूर स्थित मदनपुर से ग्राम गिदौनिया होते हुए भी एक मार्ग है, लेकिन वह भी पारौल वाले मार्ग की तरह से कच्चा और ककरीला व पथरीला है।
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लंबे समय से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों द्वारा इस स्थल के उद्धार के लिए सड़क और बिजली व्यवस्था कराने की मांग चल रही है, जिस ओर अब तक शासन, प्रशासन द्वारा बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। इस बार गत दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब ललितपुर दौरे पर आए तो ग्रामीणों ने यह मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखकर प्राचीन धार्मिक पंडवन को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान बड़ी बहू, रघुवा, धनुषरानी के अलावा महेंद्र सिंह, दीपेंद्र सिंह, राजपाल, लाखन सिंह रामकृपाल, चंदन सिंह, मुकेश तिवारी, जसवंत, प्रताप सिंह, रामकृपाल, राजेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, प्रताप सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
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