पूर्णिमा बुद्ध की किसी जीवन घटना को रेखांकित करती है
ललितपुर।
सुमेध भूमि बुद्ध विहार डॉ. अंबेडकर पार्क प्रबंध समिति द्वारा ज्येष्ठ पूर्णिमा के उपलक्ष्य में बौद्घ संतों के सानिध्य में महामंगल सुत्त, महामंगल गाथा एवं जय मंगल अटठ गाथा का पाठ किया गया और गोष्ठी का आयोजन किया गया।
बौद्घ भिक्खुओं द्वारा आयोजित गोष्ठी में बताया गया कि प्रत्येक पूर्णिमा बौद्धों के लिए विशेष महत्व का दिन होती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्णत्व को प्राप्त होता है, इसलिए पूर्णिमा आनंद दायक त्योहार के रूप में मनाई जाती है। प्रत्येक पूर्णिमा बुद्ध की किसी न किसी जीवन घटना को रेखांकित करती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चक्रवर्ती राजा सम्राट अशोक महान ने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को पांच भिक्खुओं के साथ बोधिवृक्ष की शाखा लेकर सिरीलंका भेजा था। इसी दिन वे वहां के राजा देवानाम प्रिय तिस्स से मिले और सिरीलंका के अनुराधपुरमा शहर में बोधिवृक्ष की एक शाखा लगाकर बुद्ध धम्म की शुरुआत की थी। इस प्रकार यह ज्येष्ठ पूर्णिमा बौद्धों के लिए पवित्र और मंगलकारी है। वैसे हर पूर्णिमा के दिन उपासक-उपासिकाओं द्वारा उपोसथ व्रत रखा जाता है व ध्यान साधना का अभ्यास किया जाता है। पूर्णिमा के दिन बौद्ध उपासक-उपासिकाओं को प्रात:काल उठकर स्नानादि कर बुद्ध प्रतिमा के सम्मुख मोमबत्ती, धूपबत्ती लगाकर फूल आदि से विधिवत पांच मिनट तक परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर धम्म पूजा करनी चाहिए। पूर्णिमा के दिन अष्टशील व्रत का पालन करना चाहिए। सुबह सात बजे बुद्ध विहार में जाकर, भिक्खु के हाथों से अष्टशील धारण करना चाहिए और उसका 24 घंटे तक, दूसरे दिन सुबह सात बजे तक पालन करना चाहिए। अष्टशील के दिन सफ़ेद स्वच्छ वस्त्र ही पहने जाते हैं। उपोसथ के दिन रात को कुछ भी नहीं खाते, रात के समय पूरी तरह उपवास करना होता है क्योंकि पूर्णिमा की रात उपवास करने की और वंदना पूजा-पाठ-ध्यान भावना करने की विशेष रात मानी जाती है। पूर्णिमा की रात बड़ी पावन, मंगलमय, धम्म तरंगों से ओत-प्रोत होती है। उस रात्रि को उपवास रखकर सृष्टि की धम्म तरंगों में शरीर और मन को समाविष्ट करके सुख की पाप्ति होती है इसलिए पूर्णिमा की रात को व्रत रखना चाहिए और अपनी-अपनी सामर्थ्यानुसार कुछ न कुछ दान भी अवश्य करना चाहिए। सभा की अध्यक्षता संयोजक भिक्खु डा.सुमेध थेरा व संचालन सीएल सिद्घार्थ ने किया। गोष्ठी में प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, सचिव सूर्यनाथ राम, कोषाध्यक्ष छोटेलाल सिद्घार्थ, सदस्य मंजूलता सिंह, राजकुमारी, शशीराज, सीएल सिद्धार्थ, नरेंद्र कुमार सिंह, राजाराम, जमुना प्रसाद गौतम, सुनील कुमार, लाखन सिंह आदि ने विचार रखे। यहां सावित्री देवी, रिंकी, दीप्ति, अनन्या, आदि ने कविता पाठ किया।