ललितपुर। जिले में सैंड स्टोन की खदानें दो वर्ष पहले महावीर वन्य जीव अभ्यारण की सीमा में आने की वजह बंद चल रही हैं। शासन द्वारा नियमों में ढिलाई बरतने के बाद भी खदान संचालक पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पा रहे हैं। जिससे श्रमिकों के खिले चेहरे एक बार फिर मुरझाने लगे हैं। इस व्यवसाय से करीब तीन हजार मजदूरों को रोजगार प्राप्त होता था।
शासन ने महावीर वन्य जीव अभ्यारण के 10 किलोमीटर के क्षेत्र को घटाकर एक किलोमीटर की परिधि में खनन को मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे 37 खदानों के संचालित होने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन खदान संचालक पर्यावरण से एनओसी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। जिससे खदानों का संचालन अटका हुआ है। बुंदेलखंड का सबसे पिछड़ा जनपद माना जाता है। लेकिन यहां खनिज का अपार भंडार पाया जाता है। इनमें सैंड स्टोन, ग्रेनाइट, राख फास्फेट, इमारती पत्थर समेत पर्याप्त मात्रा में खनिज का भंडार है। वर्तमान में राजस्व विभाग को लगभग पांच करोड़ से अधिक का राजस्व खजिन श्रोतों से प्राप्त होता है।
2018 की शुरुआत में 47 खदानों से खनन पर रोक लग गई थी
वर्ष 2011 में खनिज का बढ़ावा देने के लिए धौरा, जाखलौन क्षेत्र में सैंड स्टोन की खदानों के पट्टे जारी किए थे। धौर्रा-देवगढ़ क्षेत्र में लगभग 60 से अधिक सैंड स्टोन की खदानों के पट्टे हुए थे। तब पांच हेक्टेयर से छोटे पट्टों के लिए पर्यावरण की एनओसी की आवश्यकता नहीं थी। खदानों के संचालित होने से क्षेत्र के लगभग चार हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला। लेकिन वर्ष 2016 में छोटे पट्टे धारकों को भी एनओसी अनिवार्य कर दी। अगस्त 2017 से ऑनलाइन एमएम-11 कटने लगे। पर्यावरण की अनुमति न हाने से ऑनलाइन एमएम-11 निकलना बंद हो गए। पट्टेधारकों ने पर्यावरण विभाग से एनओसी के लिए आवेदन किया, लेकिन महावीर वन्य जीव अभ्यारण के चलते अनुमति देने से इंकार कर दिया। इससे वर्ष 2018 की शुरुआत में 47 खदानों से खनन पर रोक लग गई थी।
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इस क्षेत्र में लगी थी रोक
शुरूआत में जिले में 60 सैंड स्टोन की खदानें संचालित हो रही थी। लेकिन पर्यावरण विभाग द्वारा लगाई गई रोक से 47 खदानों से खनन कार्य कर बंद हो गया था। वर्तमान में सिर्फ आठ खदानों से पत्थर का खनन किया जा रहा है। इनमें दो खदानें पाली, दो बालाबेहट और चार मदनपर की खदानें शामिल हैं। इसके अलावा धौर्रा क्षेत्र की सभी खदानों में खनन के लिए प्रतिबंधित किया जा चुका था। इनमें गांव कपासी, हरदारी, जहाजपुर, अमऊखेड़ा, बंट, रमपुरा की खदानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि अब जो गांव एक किलोमीटर की परिधि में है। वहां पर खनन का रास्ता साफ हो गया है।
महावीर वन्य जीव अभ्यारण की सीमा को दस किलोमीटर से घटाकर एक किलोमीटर की परिधि की गई है। इससे 37 खदानों में खनन शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन खदान संचालक को पर्यावरण विभाग से एनओसी लाना अनिवार्य है।
नवीन कुमार दास, क्षेत्रीय खान अधिकारी, झांसी-ललितपुर