जन सुनवाई पर शिकायतों के निस्तारण में महज खानापूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी (ललितपुर)। प्रदेश सरकार द्वारा जन समस्याओं के निस्तारण के लिए बनाए जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। कई मामलों में शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हैं, इसके बाद भी उन्हें निस्तारित दर्शाया जा रहा है। यही नहीं, निस्तारण के मामले में जिले में अव्वल बताया जा रहा है। इस प्रदर्शन को देेख जिले के अधिकारी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
इसी वर्ष मई माह में बांसी निवासी हजारी अहिरवार ने नोटरी शपथ पत्र संलग्न कर जन सुनवाई पर यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके कूप निर्माण के नाम पर एक वर्ष पहले 1 लाख 30 हजार रुपये निकाले जाने के बावजूद उसका कूप निर्माण कार्य अधूरा है और फर्जी मजदूरी निकालकर हजारों रुपये हड़प लिये गये उसके खाते में भी फर्जी मजदूरी भेजी गयी है। कूप की खुदाई का कार्य मशीन से करवाया गया है। इसके निस्तारण में शिकायत कर्ता से संपर्क किए बगैर यह लिख दिया गया कि कोई फर्जी भुगतान नहीं हुआ है और यह भी लिखा कि अभी ब्लास्टिंग का भुगतान शेष है। इससे असंतुष्ट हजारी ने माह जून में जन सुनवाई पर पुन: सही से शिकायत निस्तारण हेतु शिकायत दर्ज करायी गयी जिसके निस्तारण में यह लिखा गया कि मशीन से कोई काम नहीं कराया गया। मजदूरों के खाते में राशि भेजी गयी है शिकायत कर्ता शिकायत करने आदी है और विरोधी पक्ष का है। शिकायत कर्ता जिसके कूप का निर्माण हुआ वह स्वयं मशीन से खुदाई होने उसके खाते में ही फर्जी मजदूरी भेजे जाने की बात लिख रहा है, इसके बावजूद शिकायत कर्ता से संपर्क किए बगैर शिकायत का निस्तारण कर दिया जाता है। इसी प्रकार भाजपा बांसी सेक्टर अध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा ने भारत सरकार की महत्वपूर्ण स्वच्छता योजना अंतर्गत बनाए गए। शौचालयों में ग्राम पंचायत बांसी की दलित बस्ती मजरा गोविंदपुरा में ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा धन बचाने के लिए गुणवत्ता विहीन शौचालय बनाए जाने की शिकायत जन सुनवाई पर जुलाई माह में की गई, जिसके निस्तारण में ग्राम पंचायत सचिव ने लिखा कि कोई अनियमितताएं नहीं बरती गई है। शिकायत कर्ता ने राजनीतिक द्वेषवश शिकायत की है, जबकि जांच अधिकारी एडीओ पंचायत ने निस्तारण में लिखा कि कुछ गेट खराब होने से उनको ग्राम पंचायत द्वारा बदल दिया गया है और जो कमी रह गई थी। उसे पंचायत द्वारा ठीक किया जा रहा है। सचिव द्वारा झूठी रिपोर्ट देने और जांच अधिकारी द्वारा कमी पाए जाने की पुष्टि किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह शिकायतों के निस्तारण में की जा रही खानापूर्ति के यह कोई दो मामले ही नहीं है, बल्कि अधिकांश शिकायतों का निस्तारण इसी प्रकार किया जा रहा है।