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अन्य: योगी सरकार में भी नहीं दिया जा रहा गरीबों के आशियानों पर ध्यान

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योगी सरकार को ध्यान नहीं घरबार
सरकारें तो बदली पर गरीबों का आशियाना जस का तस
कांशीराम कालोनियों में पेयजल समस्या बरकरार शो पीस बनीं पानी की टंकी
-सात-आठ वर्षों से अफसर व जनप्रतिनिधि नहीं ले रहे सुध
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। कांशीराम आवासीय कालोनियों में सुविधाओं को पूरी तरह से नजर अदाज कर दिया गया है। जल निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकियां पिछले सात-आठ सालों से शोपीस बनी हुई हैं। बसपा सरकार में बनी इन कालोनियों के बाद पांच वर्ष समाजवादी पार्टी की सरकार के बीत गए और अब योगी सरकार को भी एक वर्ष बीतने वाला है, लेकिन हालत जस के तस हैं। इन कॉलोनी में रहने वाले डेढ़ हजार से अधिक परिवारों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या कॉलोनियों में ऊपर की मंजिल में रहने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है।
बसपा सरकार के दौरान गरीब परिवारों को बेहतर सुविधा युक्त आवास मुहैया कराने के लिए शहर में विभिन्न स्थानों पर छह कांशीराम आवासीय कॉलोनियों का निर्माण कराया गया था। इन कॉलोनियों में डेढ़ हजार परिवार निवासी कर रहे हैं। कॉलोनियों के निर्माण के दौरान जल निगम विभाग ने समस्त कॉलोनियों में एक-एक पानी की टंकी व पंप हाउस का निर्माण कराया था। करोड़ों रुपयों की लागत से बनाई गई यह टंकियां मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। टंकियों के माध्यम से होने वाली जलापूर्ति सुचारु नहीं हो पा रही है।
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नारायण दासपुरा व खिरखापुरा में बनी कॉलोनियों के नल लगने के बाद से अब तक सूखे ही पड़े हैं। टंकियों में एक बार भी जलापूर्ति नहीं हो सकी है, जबकि जल निगम विभाग के कागजों में सभी छह कालोनियों में नियमित रूप से जलापूर्ति हो रही है।
उन्होंने इन कालोनियों की जलापूर्ति जल संस्थान को हैंडओवर लेने के पत्र जारी करके अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है। नियमानुसार तो टंकी व पंप हाउस की स्थापना के छह माह बाद जल संस्थान को अपने अधीन में ले लेना चाहिए था, पर वर्षों बीतने बाद भी जल संस्थान टंकी व पंप हाउस को अपने हैंडओवर नहीं ले रहा है। इस मामले में जल निगम के अधिकारियों का यही कहना होता है कि कालोनियों में जलापूर्ति की सुचारु व्यवस्था करके जल संस्थान को हैंडओवर लेने के पत्र जारी कर दिया गया था। लेकिन, जल संस्थान द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, जल संस्थान का हमेशा यही कहना होता है कि कालोनियों में जलापूर्ति प्रभावित है, जब जलापूर्ति सुचारु होगी तो जांच कराकर हैंडओवर कर लिया जाएगा। पिछले सात-आठ सालों से दोनों ही विभाग अपने जिम्मेदारियों पर खानापूर्ति करके कागजी घोड़ा दौड़ाने में लगे हैं। यहां रहने वाले परिवारों की समस्या को जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधि भी लगातार अनदेखा कर रहे हैं। सपा सरकार का पांच वर्ष का पूरा कार्यकाल बीत गया है, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं है। योगी सरकार को भी पूरा एक वर्ष होने वाला है। अभी तक जिला प्रशासन व किसी जनप्रतिनिधी ने इनकी सुध नहीं ली है। इन कालोनियों में रहने वाले डेढ़ हजार परिवारों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के भरोसे पर चल रही है। कई कालोनियों में तो हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। सबसे ज्यादा समस्या ऊपर की मंजिलों में रहने वाले लोगों को होती है। चार मंजिल तक पानी ढोने में लोगों की हालत खराब हो जाती है और पुरुष व महिलाओं समेत बच्चे व वृद्ध भी पानी ढोने में लगे रहते हैं।

यह है कालोनियों की वास्तविक स्थिति
1- सुरईघाट कॉलोनी
वार्ड नंबर दो में स्थित सुरईघाट कांशीराम कॉलौनी में करीब साढ़े तीन सौ परिवार रहते हैं। जल निगम में दर्ज रिकार्ड के आधार पर यहां बनी पानी की टंकी को भरने के लिए दो ट्यूबवेल लगाए गए थे, लेकिन यहां का पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण गोविंद सागर बांध के पास दो ट्यूबवेल का पंप हाउस बनाया गया है, इससे सुरईघाट कालोनी में जलापूर्ति की जाती है। लंबे समय से जलापूर्ति ठप पड़ी होने के कारण हैंडपंप का ही एक मात्र सहारा है।
2- खिरकापुरा कॉलोनी
वार्ड नंबर दो मोहल्ला खिरकापुरा में स्थित खिरकापुरा कॉलोनी में 64 परिवार रहते हैं। जल निगम के अनुसार यहां बनी पानी की टंकी को कसाई मंडी में बनी सीडब्लूआर (पानी की टंकी) से आई पेयजल पाइप लाइन से पंप के सहारे भरा जाता है। इसके लिए विभाग द्वारा एक कर्मचारी नियुक्त किया गया है। जबकि टंकी भरने के लिए कोई इंतजाम नहीं है और न ही कभी पानी की टंकी भरी जाती है। कॉलोनी के समस्त परिवार हैंडपंप पर निर्भर हैं।
3- नारायणपुरा कॉलोनी
वार्ड नंबर दोके मोहल्ला नारायणपुरा में स्थित कांशीराम कॉलोनी शहर की सबसे कम आवास वाली कॉलोनी है, यहां पर 32 परिवार निवास करते हैं। जल निगम के अनुसार इस टंकी को कसाई मंडी में स्थित सीडब्लूआर से भरा जाता है, टंकी तक पहुंचाने के लिए दो पंप मशीन लगाई गई है। जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार इस टंकी को अब तक एक भी बार नहीं भरा गया है और न ही किसी तरह के पंप मशीन की कोई व्यवस्था है। दे हैंडपंप भी खराब हैं।
4- राजकीय महाविद्यालय कॉलोनी
नवीन गल्ला मंडी के पीछे वार्ड नंबर छह में राजकीय महाविद्यालय के पास बनी कांशीराम कॉलोनी में करीब चार सौ परिवार रहते हैं। जल निगम के अनुसार यहां बनी टंकी को भरने के लिए दो ट्यूबवेल बनाए गए हैं, इनमें से एक से जलपूर्ति की जा रही है। कॉलोनी वासियों को महीने में कम ही पानी नसीब होता है। लोगों का कहना है कि नियमित तौर पर जलापूर्ति के लिए कई बार मांग भी की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
5- आईटीआई कॉलोनी
वार्ड नंबर 11 में स्थित आईटीआई कॉलेज के पीछे बनी कांशीराम कॉलोनी में साढ़े तीन सौ से अधिक परिवार निवास करते हैं। विभाग के अनुसार यहां की टंकी को भरने के लिए दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं, जिससे सुचारु रूप से जलापूर्ति की जा रही है। यहां केवल नीचे की मंजिलों में रहने वाले परिवारों के ही नलों में आंशिक रूप से जलापूर्ति होती है। ऊपर की मंजिलों पर रहने वाले तीन सौ परिवारों को हैंडपंप से ही काम चलाना पड़ रहा है।
6- गोविंद नगर कॉलोनी
वार्ड नंबर 14 गोविंद नगर में बनी कांशीराम कॉलोनी में साढ़े तीन सौ से अधिक परिवार रहते हैं। पानी की टंकी को भरने के लिए दो ट्यूबवेल स्थापित किए गए हैं, इनमें से एक चालू स्थिति में वहीं दूसरे ट्यूबवेल की मशीन अंदर गिर गई है। कॉलोनी में रहने वाले स्थानीय लोगों के अनुसार टंकी का कोई सहारा नहीं है। जब पंप चालू किया जाता है तो केवल नीचे की ही मंजिलों पर पानी पहुंचता है। ऊपर की मंजिलों पर रहने वालों की स्थिति बदतर है।
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फोटो- 05
-नलों में कभी निकली पानी की एक बूंद
मैं इस कालोनी में लगभग पिछले छह सालों से रह रही हूं, लेकिन कालोनी में लगे नलों में कभी पानी की एक बूंद भी नहीं आई है। पानी की टंकी केवल हम लोगों को मुंह चिढ़ाने का काम करती है।
-अनीता, स्थानीय निवासी।
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फोटो- 06
-हैंडपंप भी सपड़े हैं खराब
कालोनी में दो हैंडपंप लगे हुए हैं, जिनके भरोसे पूरी कालोनी की पेयजल व्यवस्था निर्भर है। लेकिन, पिछले दो महीनों से यह हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। ऐसे में पानी की समस्या और भी अधिक गंभीर हो गई है।
-लच्छी, स्थानीय निवासी।
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फोटो- 07
-केवल वोट के लिए आती है हमारी याद
सोचा था कि कालोनी में रहने से मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पानी की समस्या से सात सालों से है। नेताओं व जनप्रतिनिधियों को चुनाव के दौरान वोटों के लिए हमारी याद आती है।
-लकी, स्थानीय निवासी।
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फोटो- 08
-पानी ढोने में हो जाती हालत खराब
गर्मियों में ही नहीं हमेशा ही कालोनी में पानी की समस्या बनी रहती है। तीसरी मंजिल तक पानी ढोने में हम लोगों की हालत खराब हो जाती है। सुबह जब पुरुष काम-मजदूरी पर चले जाते हैं, तो फिर महिलाओं और बच्चों को जूझना पड़ता है।
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-फूलबाई, स्थानीय निवासी।

-जनता की समस्या का होगा निस्तारण
अभी इस तरह की समस्या का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। यदि इस तरह की समस्या लेकर कोई आता है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। अगर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से जनता को समस्या हो रही है, तो लापरवाह अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-मानवेंद्र सिंह
जिलाधिकरी, ललितपुर।

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