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कर्ज माफी योनजा के लाभ को भटक रहे किसान

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कर्ज माफी की राह आसान नहीं
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ललितपुर।
जनपद में फसल कर्जमाफी योजना का लाभ पाना किसानों के लिए आसान राह नहीं है। पात्र होते हुए भी वे कर्जमाफी सूची में नहीं होने के चलते नाम जुड़वाने के लिए लेखपालों के पास चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि बहुत से ऐसे भी नाम हैं, जिन्होंने कर्ज भी नहीं लिया और उनके सूची में नाम जोड़ दिए गए हैं।
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फसल ऋण मोचन योजना के तहत पहले चरण में जनपद में 7, 387 किसानों को फसल कर्ज माफी के लिए चयनित किया गया है और बैंकों द्वारा सूची फाइनल करके शासन को भेज दी गई है, इसमें किसानों की कर्जमाफी की रकम सीधे उनके खातों में पहुंचेगी। वहीं, लेखपालों द्वारा पात्र किसानों की कर्जमाफी की जो सूची तैयार की गई हैं, उनमें बहुत से पात्र किसानों को सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिससे उन्हें लेखपालों के पास चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, बहुत से किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपना किसान क्रेडिट कार्ड तक नहीं बनवाया और उनको कर्ज सूची में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में ऋण मोचन योजना के अंतर्गत जो सूची बनाई गई है, वह सवालों के घेरे में है। ग्राम बम्हौरीकलां निवासी कैलाश नारायण पुत्र केशव द्वारा बताया गया कि उनकी कृषि भूमि गांव में तो है, लेकिन उन्होंने कभी किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बनवाया है। लेकिन, जानकारी के अनुसार उनका नाम कर्जमाफी योजना में जोड़ दिया गया है। हालांकि, उनके परिवार के अन्य सदस्य द्वारा कर्ज लिया गया था और उनका नाम सूची में शामिल है। वहीं, ग्राम बम्हौरीकलां निवासी शंभूदयाल तिवारी द्वारा वर्ष 2012 में कृषक कार्य के लिए सहकारी बैंक द्वारा ऋण लिया गया था। वह ऋण मोचन योजना के दायरे में भी आते हैं, लेकिन जारी की गई सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया है। वहीं, तहसील महरौनी अंतर्गत ग्राम कुम्हैड़ी निवासी प्रेम पुत्र थोवन, बाबू पुत्र थोवन, हरिया पुत्र खलकू, कमला पुत्र हल्ले, महेश अहिरवार भी पात्र होने के बाद भी उन्हें कर्ज माफी योजना की सूची में शामिल नहीं किया गया है। वहीं, ग्राम कुम्हेड़ी के ही आशुतोष चौधरी पुत्र संतोष को कर्जमाफी की बैजनाथ की सूची में शामिल कर दिया गया है। इसी प्रकार सदर तहसील में लेेखपालों के पास रोजाना दर्जनों किसान कर्ज माफी योजना में नाम शामिल नहीं होने के चलते पहुंचकर अपनी परेशानी बता रहे हैं और योजना से लाभांवित होने के लिए सूची में नाम जुड़वाने के लिए लेखपालों के लाख जतन भी मान रहे हैं। अब ऐसे में बैंक द्वारा फसल ऋण मोचन योजना की जो सूची बनाई जा रही है, उसकी प्रमाणिकता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बता दें कि लघु और सीमांत किसानों द्वारा 31 मार्च वर्ष 2016 तक लिए गए एक लाख रुपए की सीमा तक के फसली ऋण को योजना की पात्रता की श्रेणी में रखा गया है। इसमें पांच एकड़ तक के किसानों को शामिल किया गया है। हालांकि लेखपालों के माध्यम से सत्यापन कराया जा रहा है।
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