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Lalitpur News: तालबेहट में डिप्थीरिया के प्रारंभिक लक्षण वाले 30 बच्चे चिह्नित

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विशेष अभियान चलाकर स्वास्थ्य विभाग करा रहा टीकाकरण
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संवाद न्यूज एजेंसी

ललितपुर। तालबेहट क्षेत्र में डिप्थीरिया के प्रारंभिक लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने 30 बच्चों को चिह्नित किया है। इन बच्चों के टीकाकरण की कुछ डोज बीच में छूट गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है।
बीते पांच दिनों में जिले में डिप्थीरिया के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया था। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की जांच कराई गई। तालबेहट क्षेत्र में जांच के दौरान 30 बच्चों में डिप्थीरिया के शुरुआती लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष शिविर लगाकर अब तक 15 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि शेष बच्चों को जल्द टीका लगाने की तैयारी की जा रही है। विभाग आसपास के इलाकों में भी जांच और स्क्रीनिंग कराने की योजना बना रहा है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इम्तियाज ने सभी एएनएम को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में टीकाकरण से वंचित (ड्रॉप आउट) बच्चों की पहचान कर समय से टीकाकरण सुनिश्चित करें। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।


गले में खराबी व बुखार को न लें हल्के में

गले में खराबी और बुखार आम समस्या हो सकती है, लेकिन यदि गले के अंदर सफेद या ग्रे रंग की परत जमने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। यह डिप्थीरिया का संकेत हो सकता है।

कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक जीवाणु से फैलने वाली यह बीमारी अब 16 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों के लिए भी घातक साबित हो रही है। सर्दियों में इसका खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। सीएमओ डॉ. इम्तियाज के अनुसार, पहले डिप्थीरिया का टीका केवल पांच वर्ष तक के बच्चों को लगाया जाता था, लेकिन बढ़ते खतरे को देखते हुए अब 10 और 16 वर्ष की उम्र में भी टीकाकरण किया जा रहा है। जिन बच्चों को यह डोज नहीं लगी है, वे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीका जरूर लगवाएं।
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पांच साल की उम्र में लगती है बूस्टर डोज

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. शिवप्रसाद ने बताया कि पेंटा डोज के तहत एक साल तक की उम्र में डिप्थीरिया की तीन डोज दी जाती हैं। इसके बाद 16 से 24 महीने के बीच दूसरी डोज और पांच साल की उम्र में बूस्टर डोज लगाई जाती है। बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए 10 और 16 वर्ष की उम्र में भी एक-एक अतिरिक्त डोज दी जा रही है, जिसके लिए स्कूलों में अभियान चलाया जा रहा है।


मरीज के नाक और गले में होता है गंभीर संक्रमण

डॉ. देशराज के अनुसार, कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया जीवाणु जहर छोड़ता है, जिससे नाक और गले में गंभीर संक्रमण हो जाता है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से तेजी से फैलता है।

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72 घंटे में एंटीटॉक्सिन इंजेक्शन से बच सकती है जान

ईएनटी विभाग के डॉ. अनुपम मिश्रा ने बताया कि नवंबर से जनवरी के बीच डिप्थीरिया का खतरा अधिक रहता है। तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी और गले में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। लक्षण दिखने पर 72 घंटे के भीतर डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन इंजेक्शन लगने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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अमर उजाला की खबर के बाद हुआ स्वास्थ्य महकमा अलर्ट

20 दिसंबर को अमर उजाला में ‘जिले में डिप्थीरिया की दस्तक, 24 घंटे में मिले दो नए मरीज’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हुआ। इसके बाद प्रभावित इलाकों में स्क्रीनिंग कराई गई, जिसमें तालबेहट क्षेत्र के 30 बच्चों में प्रारंभिक लक्षण पाए गए। सभी का टीकाकरण कराया जा रहा है।
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