स्ट्रेचर पर मरीज लेकर डीएम के दरबार पहुंचा तीमारदार
ललितपुर। जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के नाम पर चालीस हजार रुपये मांगने और रुपए नहीं देने पर अस्पताल से भगाने का आरोप लगाते हुए एक तीमारदार स्ट्रेचर पर ही मरीज को लेकर डीएम के दरबार में पहुंच गया और चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
जिला अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर में एक मरीज के साथ चिकित्सक द्वारा इलाज के नाम पर रुपये मांगने और रुपये नहीं देने पर अस्पताल से भगा देने का अमानवीय मामला सामने आया है। एक तीमारदार द्वारा उसके मरीज को जिला अस्पताल में तैनात एक हड्डी रोग विशेषज्ञ पर टूटे हुए पैर का ऑपरेशन करने के नाम पर अवैध तरीके से 40 हजार रुपये मांगने एवं तीमारदार द्वारा रुपये नहीं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। चिकित्सक के इस प्रकार के बरताव से पीड़ित तीमारदार अपने मरीज को जिला अस्पताल की स्ट्रेचर पर ही लेकर कलेक्टर में जिलाधिकारी के दरबार में पहुंच गया और जांच कराते हुए उसके मरीज का सही इलाज कराए जाने और दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। थाना जाखलौन अंतर्गत ग्राम पिपरिया वंशा निवासी राकेश तिवारी ने जिलाधिकारी को बताया कि उसके भाई रामकिशन तिवारी का मुख्यालय स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा के पास एक मोटर साइकिल की टक्कर के चलते दाहिना पैर टूट गया था। जिसका उपचार कराने के लिए रामकिशन को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया और यहां उउसे ट्रामा सेंटर भेजा गया। ट्रामा सेंटर में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा उपचार किया गया। उसने आरोप लगाया कि उक्त चिकित्सक द्वारा उसके भाई के पैर का ऑपरेशन कराने के नाम पर चालीस हजार रुपये की मांग की गयी। पहले चिकित्सक बोला कि वह पच्चीस हजार रुपए जमा कराए और उसके बाद भाई का ऑपरेशन किसी अन्य प्राईवेट अस्पताल में कराकर जिला अस्पताल में बैड दिला दिया जाएगा। जिस पर वह शनिवार की सुबह तक रुपयों का इंतजाम नहीं कर पाया तो उसे बिना ऑपरेशन किए ही कच्चा प्लास्टर बांधकर जिला अस्पताल से रेफर करने की बात कही गई। जिस पर उसने अपनी आर्थिक तंगी का हवाला भी दिया, लेकिन उक्त चिकित्सक ने उसे ट्रामा सेंटर से बाहर निकाल दिया। जिसके बाद अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां उसने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
--
मरीज के पैर फेक्चर हो जाने से खून की नलिका हड्डियों में फंस गई थी जिससे यहां ऑपरेशन नही हो पा रहा था। इस कारण चिकित्सक ने मरीज को रेफर किया था। लेकिन वह जबरन ऑपरेशन का दबाब बना रहा था। उस दौरान चिकित्सक अवकाश पर भी जा रहे थे, रुपये मांगने का आरोप निराधार है।
डॉ. एस के वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल