पंजीयन कृषि का, उपयोग व्यवसायिक का
परिवहन विभाग को चूना लगा रहे ट्रैक्टर चालक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले में ट्रैक्टर ट्राली कृषि कार्य के पंजीकरण की आड़ में कई चालक उनका व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं। ऐसे वाहन खेतों की जगह सड़कों पर खनिज संपदा लेकर दौड़ते नजर आ रहे हैं। परिवहन विभाग को राजस्व चूना लग रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
जिले में परिवहन विभाग में कृषि कार्य के लिए 15 हजार ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन है। इन सभी ट्रैक्टरों का पंजीयन कृषि कार्यों के लिए किया गया है। इसके साथ ही कृषि कार्य में पंजीयन कराने से 100 प्रतिशत टैक्स की छूट दी जाती है। इससे किसी प्रकार का कोई कर नहीं देना पड़ता है। अधिकांश लोग ट्रैक्टरों का पंजीयन कृषि के नाम पर करा लेते हैं। जबकि व्यवसायिक कार्य करने के लिए परिवहन विभाग में शुल्क 12 सौ रुपये है। इसके साथ ही तिमाही में 525 रुपये कर जमा करना होता है। वहीं, ट्राली का वजन के हिसाब से कर जमा करना होता है। लेकिन जिले में कृषि कार्य के नाम पर पंजीयन लेकर व्यवसायिक उपयोग करने का धंधा खूब फल फूल रहा हैं। जिले में ऐसे वाहनों की भरमार बनी हुई। यहां पर खनिज अकूत मात्रा में विद्यमान है। जिससे इनका अधिकतर उपयोग खनिज में किया जा रहा है। खनिज के साथ ही ट्रैक्टर, ट्रालियों का उपयोग बिल्डिंग मेटेरियल ढोने में किया जा रहा है। जिसमें सड़क पर बालू, गिट्टी, सीमेंट, सरिया, गुम्मा आदि सामान भर कर दौड़ रहे हैं। जो परिवहन के राजस्व को चपत लगा रहे हैं। साथ ही अधिकांश गांव में ट्रैक्टर ट्रालियों में सवारियों का ढोया जा रहा है। यह वाहन विवाहों में बारात ले जाने व अन्य वैवाहिक सामानों को ढो रहे हैं। जबकि अधिक सवारियों के होने से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी है। इसके बावजूद संबंधित विभागीय अधिकारी इस ओर अंजान बने हुए हैं।
जिले में कृषि कार्य पंजीकरण में व्यवसायिक उपयोग करने वाले ट्रैक्टर ट्रालियों की अभियान चलाकर जांच की जाएगी। जिसमें कृषि के रजिस्ट्रेशन पर व्यवसायिक उपयोग करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।
सत्येंद्र कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, ललितपुर