बगैर तैयारी के परीक्षा में बैठ रहे परिषदीय स्कूलों के छात्र
समय से नहीं मिल सकी पुस्तकें, कईयों में आज तक नहीं मिली
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को समय से किताबें मुहैया नहीं हो पाने की स्थिति में बगैर तैयारी के ही परीक्षा में बैठना पड़ रहा है। तमाम स्कूलों में किताबें या तो पहुुंच नहीं पाई हैं या फिर देरी से पहुंचने के कारण बच्चों की परीक्षा की तैयारी नहीं हो पाई है।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में एक लाख सत्तर बच्चे अध्ययनरत हैं। शासन ने इन बच्चों को शैक्षिक सत्र की शुरुआत के समय यूनिफार्म, किताबें उपलब्ध कराने की बात कही थी। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर शासन के निर्देशों का समय से अनुपालन नहीं करा सके। जिले के तमाम परिषदीय स्कूलों में अब तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। कहीं स्कूल तो ऐसे हैं, जिनमें आधी अधूरी ही किताबें पहुंच पाई हैं। किताबों की लेट आपूर्ति होने का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सत्र परीक्षाओं में बच्चे बगैर तैयारी के बैठ रहे हैं। जूनियर स्तर के छात्रों के सामने समस्या विकट हो गई है। अंग्रेजी विषय की नई किताब अब हाथ लगी है, इससे पहले वह पुरानी किताब से पढ़ते हैं। वर्तमान में जो नई किताब मिली है, उसमें पाठ्यक्रम ही बदल गया है। इस स्थिति से अध्यापक भी परेशान हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि बच्चों के लिए प्रश्न पत्र नई किताब बनाए या फिर पुरानी से। यदि पुरानी से बनाते हैं तो नियमों की अवहेलना होगी और नई से बनाते हैं तो बच्चों को प्रश्न समझ में नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है। इस तरह शिक्षकों के सामने अजीबोगरीब स्थिति बन गई है।
डीएम ने गोदाम का किया निरीक्षण
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने गोदाम में किताबें रखी होने की सूचना पर छापा मार दिया। इस दौरान कक्ष में बड़ी संख्या में किताबें रखी हुई थी। मड़ावरा के कुछ शिक्षक इन्हें ले जा रहे थे। बता दें कि सोमवार को बीएसए से किताबों के उठान का ब्योरा तलब किया गया था। इस दौरान उन्होंने गहरी नाराजगी जाहिर की थी। अब बीएसए से स्पष्टीकरण तलब करने की तैयारी हो रही है।
कैलगुवां का एनपीआरसी बीमार
कैलगुवां क्षेत्र का एनपीआरसी बीमार हो गया है। जिससे यहां की किताबों का उठान नहीं हो पाया है। बाकी सभी जगहों पर किताबें पहुंचाई जा चुकी हैं। सत्र परीक्षा में अध्यापक को निर्णय लेने का अधिकार है कि उन्हें कितने सिलेबस से प्रश्न पूछने हैं?
मायाराम, बीएसए