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स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर दस अगस्त को 4.73 लाख बच्चों को खिलार्ठ जाएगी एल्बैंडाजोल की दवा

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दस को 4.73 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी कृमि नाशक दवा
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एक से 19 वर्ष के बच्चों को खिलाई जाएगी दवा, दी गई जिम्मेदारी
फरवरी के चरण में एल्बैंडाजोल दवा से वंचित रहे गए थे 79 हजार 890 बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। देश को कृमि मुक्त बनाने के लिए व बच्चों और किशोर-किशोरियों में खून की कमी जैसी समस्या से निजात पाने के लिए 10 अगस्त को कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा, जिसमें 1 से 19 वर्ष के चार लाख 73 हजार 324 बच्चों को एल्बेंडेजॉल की गोली खिलाई जाएगी। जनपद व ब्लॉक स्तर पर पेट के कीड़े की दवा सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों एवं मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर निशुल्क खिलाई जाती है।
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जनपद में सरकारी और सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूलों को मिलकर कुल 1912 स्कूल और 1124 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। कृमि दिवस पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुल 4 लाख 73 हजार 324 बच्चों को कृमि मुक्ति दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के 125899 बच्चे हैं। आंगनबाड़ी में उन किशोर और किशोरियों को भी चिह्नित किया गया हैं जो स्कूल नहीं जाते हैं। वहीं फरवरी 2018 में कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया था, जिसमें 4,73,324 बच्चों को लक्षित किया गया था, जिसमें से 3,93,494 बच्चों को एल्बेंडेजॉल की दवा खिलाई गई थी। इनमें से 1,89,137 लड़कियों और 2,04,375 लड़कों को दवा खिलाई गई थी। इसके तहत फरवरी माह में कुल 79 हजार 890 बच्चे यह दवा से वंचित रह गए थे। खून की कमी (एनीमिया) का मुख्य कारण पेट के कीड़े भी है। इसकी वजह से बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाता हैं। कृमि मुक्ति दिवस मनाए जाने का उद्देश्य है कि सभी बच्चों को कृमि के कारण कुपोषित होने से बचाया जा सके। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में मुख्य चिकित्सा कार्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के पूर्व आयोजन समीक्षा बैठक की गई। इसमें मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। वहीं सभी को निर्देश दिये कि 10 अगस्त को सभी विद्यालय और आंगनबाड़ी स्कूल खुले रहेंगे, जिसमें 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडेजॉल की खिलाई जाएगी। यदि किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूलों में दवा की पर्याप्त मात्र नहीं है तो संबंधित अधिकारी या शिक्षक कार्यालय से एकत्रित कर लें क्योंकि कोई भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए। इसके अलावा उन्होने संबंधित अधिकारियों को कृमि दिवस पर कम से कम चार विद्यालयों और आंगनबाड़ी स्कूलों में विजिट करने के निर्देश दिये। बैठक में बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला कम्यूनिटी प्रोसेस प्रबंधक, मंडलीय कार्यक्रम समन्वयक कृमि एवं अन्य मौजूद थे। नोडल अधिकारी डा. आरके सोनी ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में रह रहे ज्यादातर बच्चों में पेट से संबंधित अधिक बीमारियों का खतरा होता है क्योंकि उनके घर का वातावरण और आसपास फैली गंदगी बीमारियों की मुख्य वजह बनी हुयी है। ज्यादातर बच्चे बाहर खेलते समय कब किस चीज को हाथ लगाते है उनको पता ही नही होता है। उन्हीं गंदे हाथों से घर की सारी चीजों को छूना, बिना हाथ पैर धोकर कुछ भी खा लेना, बिना ढका हुआ पानी पीना इन्हीं सब लापरवाहियों की वजह से बच्चों के पेट में बीमारियों का आगमन होता है। जो कभी कभार घातक भी साबित हो सकता है। शहरों की बस्तियों में रहने वाले बच्चों को भी कृमि के कीड़े होने की संभावना ज्यादा रहती हैं।
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