अटककर रह गया मनरेगा से पौधरोपण का प्रस्ताव
उपायुक्त श्रम रोजगार ने वन विभाग के प्रस्ताव पर आपत्ति लगाई
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
आगामी मानसून सीजन में होने वाले पौधरोपण में मनरेगा की भागीदारी स्पष्ट नहीं हो पा रही है। उपायुक्त श्रम रोजगार ने वन विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर आपत्ति लगा दी हैं, जिससे मनरेगा से कराने वाले कार्य अटककर रह गए हैं।
वन विभाग हर साल 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल को घना रूप देने के लिए पौधरोपण कराता है। शासन ने आगामी मानसून सीजन के लिए लक्ष्य तय कर दिया है, जिसके तहत कुल 2352 हेक्टेयर क्षेत्र में 18 लाख 22 हजार 200 पौधों का रोपण किया जाना है। इसमें से 275 हेक्टेयर क्षेत्र में सामाजिक वानिकी योजना के तहत तीन लाख 2500 पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, मनरेगा के अंतर्गत 2077 हेक्टेयर क्षेत्र में 15 लाख 19 हजार 700 पौधों का रोपण किया जाना। मनरेगा के पौधरोपण के लिए उपायुक्त श्रम एवं रोजगार की मंजूरी आवश्यक है। बीते माह वन विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा, जिसमें उपायुक्त श्रम और रोजगार जय सिंह ने आपत्तियां लगा दी हैं। उनका कहना है कि वन विभाग द्वारा भेजे प्रस्ताव में न तो गाटा संख्या दर्शाई गई है और न ही चिह्नित भूमि के फोटोग्राफ उपलब्ध कराए गए हैं। जिसे वन विभाग के अफसरों से मांगा गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक मांगे गए अभिलेख मुहैया नहीं कराए हैं। जिससे प्रस्ताव पर विचार किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। मनरेगा का प्रस्ताव अटकने से गड्ढा खुदान जैसे कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान में विभागीय अफसर केवल स्वीकृत योजनाओं पर ही काम कर रहे हैं। यदि मनरेगा का प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ तो शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य का घटना तय माना जा रहा है। उधर, सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक गोविंद शरण का कहना है कि मनरेगा से जो पौधरोपण कराया जाना है, उसका नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। जिसे शीघ्र ही भेजा जाएगा।
मनरेगा में रुचि नहीं दिखा रहे अफसर
वन विभाग के अफसर मनरेगा से कराने वाले पौधरोपण में तमाम तरीके से समस्याएं देख रहे हैं। वह इस कार्य में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभागीय अफसर मनरेगा से कम से कम पौधरोपण का लक्ष्य चाहते हैं, जिससे कि उन्हें मजदूरों के भुगतान के फेर में नहीं फंसना पड़े।
पौधरोपण की चल रही जांचे
वन विभाग द्वारा पूर्व के वर्षों में पौधरोपण कराया गया है, जिसकी विभिन्न स्तरों पर जांचे चल रही हैं। यह भी एक कारण माना जा रहा है कि विभागीय अफसर अब किसी नई जांच के फेर में फंसना नहीं चाहते हैं।