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दिव्यांग नाम से सम्मानजनक संबोधन तो मिला, लेकिन नहीं मिली जरूरी सुविधाएं
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ललितपुर। विकलांगों को भले ही दिव्यांग कहा जाने लगा हो, लेकिन इस सम्मानजनक संबोधन से उनकी समस्याओं में कोई कमी नहीं आई है। अधिकतर सार्वजनिक जगहों पर उनके लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है। नगर पालिका ने जनता की सुविधा के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर लगभग एक दर्जन सामुदायिक सार्वजनिक शौचालय बनवाए हैं और इससे भी अधिक प्रशाधन केंद्र बने हैं, लेकिन कहीं पर भी दिव्यांगों के लिए सार्वजनिक शौचालय व प्रशाधन केंद्र नहीं हैं। इससे मुख्य बाजार समेत बस स्टैंड व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगों को काफी असुविधा होती है। इसके अलावा सरकारी दफ्तरों, शैक्षिक संस्थानों व अन्य कार्यालयों में भी दिव्यांगों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। नगर पालिका की तरह अन्य ऐसे विभाग जहां पर आमजनों के साथ दिव्यांगों का भी आना जाना होता है, ये कार्यालय बहुमंजिला इमारतों में संचालित होते हैं। यहां सीढ़ी चढ़ने उतरने में काफी परेशानी होती है।
बैंकों व डाकघरों में भी नहीं रैम्प
स्थानीय बैंकों और डाकघरों में दिव्यांगों की सुविधा के लिए रैम्प की व्यवस्था नहीं है। शहर में बैंकों की भरमार है, एक दर्जन से अधिक बैंकों की शाखाएं संचालित है। इनमें से पूरे शहर में केवल देना बैंक ही है, जिसकी बैंक और एटीएम दोनों में ही दिव्यांगों की सुविधा के लिए रैम्प बना हुआ है। इसके अलावा किसी भी सरकारी व निजी बैंकों यहां तक कि डाकघरों में भी दिव्यांगों के लिए रैम्प नहीं बना है। इनमें पीएनबी व एसबीआई जैसे लीड बैंक भी शामिल हैं, जहां दिव्यांगों को होने वाली समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया गया है। इसके अलावा कुछ बैंक तो एक व दो मंजिला इमारतों में संचालित हो रहे है इनमें बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, एसबीआई सिटी ब्रांच व जिले का प्रधान डाकघर शामिल हैं, जहां दिव्यांगों को एक-दो मंजिल सीढ़ी चढ़ने की समस्या से जूझना पड़ता है। इसी तरह एटीएम से रुपये निकालने में भी दिव्यांगों की असुविधा होती है।
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रेलवे ने बनाया मजाक
दिव्यांगों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर एक पर दिव्यांग शौचालय बनाया गया है, लेकिन इसका लाभ दिव्यांग नहीं ले पा रहे हैं रेलवे ने शौचालय में ताला लगा रखा है। इसके अलावा रेलवे के अधिकारियों ने शौचालय पर बोर्ड लगा रखा है कि शौचालय का उपयोग करने के लिए ताले की चाबी स्टेशन मास्टर से प्राप्त करें। यह दिव्यांगों के साथ किसी मजाक से कम नहीं है।
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वहीं जिला मुख्यालय पर केवल जिला अस्पताल परिसर और विकास भवन परिसर में दिव्यांगों की सुविधा के लिए शौचालय बनाये गए हैं। विकास भवन में लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए शौचालय में ताला जड़ा होने के कारण दिव्यांग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और असुविधा का सामना करने को मजबूर है।
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