बांध को कमजोर कर रहे पेड़-पौधे
ललितपुर। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की उदासीनता और लचर कार्यप्रणाली के कारण शहर की पेयजल व्यवस्था के मूल स्त्रोत गोविंद सागर बांध की सुरक्षा और आधे शहर वासियों की जान खतरे में आ सकती है। बांध के बंध पर बने पिचिंग स्थल पर काफी अधिक मात्रा में पेड़-पौधे व झाड़ियां उग आई हैं, इनकी जड़े पिचिंग को अंदर से ही कमजोर कर रही हैं और पिचिंग के उखड़ चुके वोल्डर भी एक बजह बन सकते हैं।
बरसात का मौसम खत्म हो गया है और जाड़े ने दस्तक दे दी है। वर्तमान में शहर का लगभग सात दशक पुराना हो चुका गोविंद सागर बांध काफी हद तक भरा हुआ है और इससे बांध में अच्छा खासा दबाव भी है। बांध में भरे इसी पानी के दबाव से बांध की सुरक्षा करने के लिए पानी वाली दिशा में पक्का निर्माण कर पिचिंग स्थल बनाया जाता है। बरसात शुरू होने से पहले हर वर्ष इस पिचिंग स्थल की मरम्मत और इस पर उगी झाड़ियों व पेड़-पौधों को हटाया जाता है। इस वर्ष बरसात होने से पहले सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा न ही पिचिंग की मरम्मत कराई गई और न ही इस पर उगे पेेड़-पौधों को हटाया गया। जबकि मरम्मत व रखरखाव के लिए शासन से लाखों रुपए आते हैं और इन रुपयों को बिना काम कराए ही ठिकाने लगा दिया जाता है। इस कारण से वर्तमान में पिचिंग पर लगे पेड़-पौधे 08 से 10 फिट तक ऊंचे हो चुके हैं, जो कुछ ही दिनों में पेड़ का रूप ले लेंगे। इसके अलावा पिचिंग पर काफी क्षेत्रफल में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। उखड़े पड़े वोल्डरों और इन पेड़-पौधों के कारण बांध का बंध कमजोर हो रहा है। इस ओर विभागीय अधिकारियों और जिला प्रशासन को भी गंभीरता से ध्यान देना होगा और आवश्यक कार्रवाई करानी होगी। यह बांध पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था का एक मात्र साधन है और आस-पास के गांवों की सिंचाई व्यवस्था भी इसी बांध पर निर्भर है। इसके अलावा यदि बांध को कोई नुक्सान पहुंचता है तो लगभग आधा शहर इससे प्रभावित होगा, क्योंकि आधा शहर बांध की तलहटी में बसा हुआ है। इसके बावजूद भी यह लापरवाही बरती जा रही है और अधिकारी उदासीन बने हुए हैं।
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पिछले वर्ष आई थी बांध में दरार
पिछले वर्ष सितंबर माह में इसी बांध में दरार आ गई थी, उस समय बांध का जलस्तर काफी अधिक था। बांध में दरार आने से जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तमाम प्रयास कर दरार को बढ़ने से रोका जा सका। इसके बाद भी विभाग ने कोई सबक नहीं लिया। यह लापरवाही इस घटना को पुनरावृत्ति की वजह बन सकती है।
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यह मुहल्ले हैं दायरे में
बांध का बहाव क्षेत्र शहर के बीचो-बीच स्थित बसे बाजार व घनी आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरता है। यदि बांध के फटने की स्थिति पैदा होती है तो हजारों परिवार इससे प्रभावित होंगे। प्रभावित इलाके के दायरे में मुहल्ला गोविंद नगर, रावतयाना, नदीपुरा, लक्ष्मीपुरा, सरायपुरा, चौबयाना, खिरकापुरा, मऊठाना आदि इलाके इस दायरे में आते हैं।
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इनका कहना है
पिचिंग की मरम्मत व रखरखाव के लिए इस वर्ष कोई बजट नहीं आया है, जैसे ही बजट आता है मरम्मत व पेड़-पौधे हटाने का काम कराया जाएगा।
-अतुल कुमार गुप्ता
अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड सिंचाई विभाग ललितपुर।