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सरकारी स्कूलों में चालीस फीसदी से कम बच्चों की हाजिरी

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सरकारी स्कूलों में 40 फीसदी से कम बच्चों की हाजिरी
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ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए भले ही एक अप्रैल से नवीन शैक्षिक सत्र प्रारंभ कर दिया हो, लेकिन इसके लिए बच्चे तैयार नहीं दिख रहे हैं। स्कूलों में जितने बच्चे नामांकित हैं, उससे ज्यादा बच्चे घर बैठकर अपने भाई व बच्चों की देखभाल करने में लगे हैं। इससे न केवल मिड-डे मील योजना सफर कर रही है, बल्कि गुणवत्तापरक शिक्षा देने के मंसूबों पर पानी फिर रहा है। बीएसए का कहना है कि इस समय में बच्चों की उपस्थिति स्कूलों में 40 फीसदी के आसपास दर्ज की जा रही है।
शासन ने छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को जूनियर स्तर की नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराने के लिए सर्व शिक्षा अभियान चला रखा है। योजनांतर्गत स्कूली बच्चों को नि:शुल्क किताबें, यूनिफार्म और दोपहर का खाना दिया जाता है। बेसिक शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए नवीन शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से प्रारंभ कर दिया है। गत माह स्कूल चलो अभियान की रैली गाजे-बाजे के साथ निकाली गई थी। इसका परिणाम यह रहा कि स्कूलों में एक लाख से ज्यादा बच्चों का नामांकन हो गया है। अब स्कूलों में कक्षाएं संचालित होने लगी हैं, लेकिन बच्चों ने स्कूलों में आना आरंभ नहीं किया है, जिससे स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम बनी हुई है। इसमें कई शिक्षकों की भी लापरवाही उजागर हो रही है। बीते दिनों बीएसए मनोज कुमार वर्मा ने कई लापरवाह शिक्षकों को निलंबित भी किया है। इसके बाद भी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति नहीं बढ़ सकी है। इस स्थिति के लिए शिक्षक व अधिकारी अपने-अपने हिसाब से कारण गिना रहे हैं। कारण जो भी हो लेकिन इससे शिक्षा विभाग के गुणवत्तापरक कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा है।
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प्रभारी बीएसए को मिली थी खराब स्थिति
खंड शिक्षा अधिकारी ब्रजेश सिंह ने प्रभारी बीएसए के तौर पर कई विद्यालयों का निरीक्षण पिछले दिनों किया था। इसमें पूर्व माध्यमिक विद्यालय जाखलौन में दो बच्चे उपस्थित थे। प्राथमिक विद्यालय बंदरगुढ़ा व प्राथमिक स्टेशन बालक में बच्चों की उपस्थिति शून्य पाई गई थी। यही नहीं, कई शिक्षक भी गायब मिले थे।

ये है वजह
प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती देहरे बाबा मसौराकलां के प्रधानाध्यापक अनंत तिवारी मानते हैं कि शासन ने भलेे ही शैक्षिक सत्र में परिवर्तन कर दिया हो, लेकिन अभिभावक भलीभांति जागरूक नहीं हो पाए हैं। अधिकांश अभिभावक अभी भी यह धारणा बनाए हुए हैं कि स्कूलों में इस समय पढाई नहीं होती, केवल बच्चों को बैठने के लिए बुलाया जाता है। इससे अभिभावक बच्चों को घर पर ही अपने भाई व बहनों की देखभाली के लिए रोक देते हैं और उनके माता- पिता काम के लिए निकल जाते हैं। इसके अलावा गर्मी भी एक बड़ा कारण है।
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समय बदलने का नहीं हुआ फायदा
गर्मी को ध्यान में रखकर स्कूलों के समय में परिवर्तन किया गया है। वर्तमान में सुबह 7.30 बजे से दिन में 11.30 बजे तक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम बनी हुई है। जिससे स्कूलों में शैक्षिक वातावरण तैयार नहीं हो पा रहा है।
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------इस समय गर्मी अधिक पड़ रही है। इससे बच्चे स्कूल आने से कतरा रहे हैं। वहीं, तमाम बच्चे शादी समारोह में व्यस्त हैं। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
- मनोज कुमार वर्मा
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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