‘ढाई सौ रुपये से कम नहीं चाहिए पारिश्रमिक’
ललितपुर।
पालिका प्रांगण में नगर पालिका परिषद के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने 7वें दिन धरना-प्रदर्शन करते हुए 250 रुपये प्रतिदिन से कम पारिश्रमिक लेने से साफ इंकार कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारी हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
बृहस्पतिवार को पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने धरना स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों की समस्याएं सुनी। इस दौरान उन्होंने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को शीघ्र समस्याओं के निस्तारण भरोसा दिया। वहीं, कर्मचारी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि ठेकेदार ने नगर पालिका परिषद से 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पारिश्रमिक देने का अनुबंध किया है। इससे कम पर वेतन स्वीकार नहीं है। यदि ठेकेदार तय अनुबंध का पालन करने में समर्थ नहीं है तो उसका ठेका निरस्त किया जाए। मंजीत करौसिया, दीपक घावरी, कुन्जबिहारी बाबरा ने कहा कि जब तक ठेका निरस्त नहीं होता तब तक वह प्रतिदिन भूखे रहकर धरना-प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने ठेकेदार से मुक्त करा कर नगर पालिका के अधीनस्थ रखने की मांग की। मांगे पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग ठेकेदार किरन जैन के प्रतिनिधि पालिका कर्मचारियों के साथ 14 जून की शाम लगभग साढे़ चार बजे बजे बदसलूकी है। धरना-प्रदर्शन के दौरान लालाराम वाल्मीकि, मंजीत करौसिया, कुंजबिहारी बाबरा, दीपक घावरी, जीवन दाऊ, किरन करौसिया, चन्द्रभान करौसिया, अमित चौहान, कपिल राठौर, गौहर खान, आदेश कुमार, रूपेश कुमार उपस्थित रहे। उधर, स्वायत्य शासन कर्मचारी महासंघ उप्र शाखा ललितपुर के समस्त पदाधिकारियों ने एक ज्ञापन नपा अध्यक्ष सुभाष जायसवाल को देकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन पर संरक्षक रामसेवक बाल्मीकि, जिलाध्यक्ष हबीब खान, उपाध्यक्ष दीनदयाल सोनी, जिला महामंत्री रमाकांत तिवारी, कोषाध्यक्ष सुधीर रावत, प्रचार अमित रैकवार, अभिषेक चौबे, दीपक कुमार, चंद्रविनोद मिश्रा, अमित पाराशर, महेंद्र यादव, संजय वाल्मीकि, विनोद अहिरवार आदि के हस्ताक्षर बने हैं। बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष विवेक तिवारी ने डीएम को ज्ञापन देकर नगर पालिका के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की मांगे पूरी करने की मांग की है। ज्ञापन पर देश प्रेमशंकर गुप्ता, मेहरबान सिंह रोंड़ा, नीतेश पाठक, दिलीप, शिवम, सुधान्शु मालवीय, मनीष रावत, विशाल पटैरिया आदि के हस्ताक्षर हैं। इधर, ठेकेदार किरन जैन ने जिलाधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि चौदह जून को करीब तीन बजे चयनित कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंचे। लेकिन, अधिशासी अधिकारी ने उन्हें गुमराह कर दिया। जिससे कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया। जिस पर डीएम मानवेंद्र सिंह ने इस मामले के निस्तारण की जिम्मेदारी एसडीएम सदर को सौप दी है।