संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले की 30 सहकारी समितियां एक अधिवक्ता के माध्यम से जीएसटी जमा करा रही थीं। जांच में सामने आया कि अधिवक्ता पिछले सात वर्षों से जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के नाम पर समितियों के सचिवों से रिटर्न राशि से अधिक धनराशि अपने खाते में मंगाता रहा। बैलेंस शीट में जमा राशि से अधिक जीएसटी दिखाकर यह रकम वसूली गई। आयकर विभाग से नोटिस मिलने के बाद पूरा मामला सामने आया, जिसके बाद जीएसटी विभाग ने भी रिटर्न रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
19 लाख रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा : सहकारी समितियों के सचिवों ने 2017–18 से 2024–25 तक रिटर्न दाखिल करने के लिए अधिवक्ता को अधिकृत कर रखा था। आरोप है कि अधिवक्ता ने गेहूं क्रय केंद्रों के लिए तैयार बैंलेंस शीट में गलत विवरण दर्ज किया, जबकि गेहूं पर जीएसटी शून्य है। आयकर विभाग ने टर्नओवर के मुताबिक ऑडिट न होने पर नोटिस जारी किया, जिसके बाद सचिवों ने उपायुक्त एवं उपनिबंधक सहकारिता झांसी को पत्र लिखा।
रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि समितियों ने सात वर्षों में अधिवक्ता को 36,09,254 रुपये दिए, जबकि उसने मात्र 16,46,272 रुपये की जीएसटी जमा की। यानी 19,62,982 रुपये अधिक लिए गए। वहीं, पूरे प्रकरण की जानकारी सात माह पूर्व ही अधिकारियों को दी जा चुकी थी, लेकिन सहायक निबंधक आयुक्त सहकारिता ने कोई कार्रवाई नहीं की है।