केंद्रीय मंत्री के बयान पर क्षत्रिय महासभा ने जताया रोष
महरौनी। लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अनुराग शर्मा के पक्ष में महरौनी के सद्भावना मंच पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने समुदाय विशेष को लेकर दिए गए बयान के खिलाफ क्षत्रिय समाज ने रोष व्यक्त किया है। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा एवं राष्ट्रीय कारणीय सेना ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि क्षत्रिय सभी जाति धर्म के लोगों के साथ सामंजस्य बैठाते हैं, भाईचारा के साथ रहते हैं। इसी की वजह से ललितपुर की ग्राम पंचायतों में 85 से अधिक क्षत्रिय ग्राम प्रधान बनकर विकास की दशा व दिशा तय कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अपने मन मुताबिक लोकसभा प्रत्याशी लाना चाहती थीं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के कारण ऐसा नहीं हो सका और वह असंतुष्ट हैं। इसीलिए क्षत्रियों पर अशोभनीय टिप्पणी की है। उनके प्रचार करने से प्रत्याशी को नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय कारणीय सेना के युवा जिलाध्यक्ष ध्रुवप्रताप सिंह, जीतू राजा, बॉबी राजा, अभय राजा, डग्गी राजा, पृथ्वीराज, पुष्पेंद्र, वीरेंद्र सिंह, रविंद्र प्रताप सिंह, रजऊ राजा, चंद्रप्रताप सिंह, शनि राजा, कप्तान सिंह, सत्येंद्र सिंह, महिपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
सामंतवाद को किसी जाति से न जोड़ा जाए: उमा
केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट कर दी बयान पर सफाई
कांग्रेस, सपा व बसपा को सामंतवाद का पोषक बताया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। महरौनी में आयोजित जनसभा में बीते रोज दिए भाषण से एक जाति विशेष में फैले आक्रोश के बाद केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ट्वीट कर सफाई दी है। साथ ही उन्होंने इस मामले में कांग्रेस, सपा और बसपा को घेर लिया। उनका कहना है कि उन्होंने सामंतवाद के बारे में कुछ पुरानी बातों का जिक्र किया था। उनकी टिप्पणी को किसी जाति से जोड़कर राजनीति की जा रही है जो निंदनीय है।
बीते रोज भाजपा प्रत्याशी अनुराग शर्मा के समर्थन में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने महरौनी में भाषण दिए थे। इस दौरान पुरानी बातों का जिक्र करते हुए सामंतवाद पर हमला बोला था। यह टिप्पणी एक जाति को आहत कर गई। रविवार देर शाम से ही सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री के वक्तव्य की आलोचना होने लगी। सोमवार को प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। उधर, केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट कर पूरे मामले पर सफाई दी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि यह टिप्पणी किसी जाति के खिलाफ नहीं थी, बल्कि एक व्यवस्था के खिलाफ थी जो हमारे देश में खत्म हो गई है। किंतु, कांग्रेस में आज भी नेहरू और गांधी परिवार के रूप में विद्यमान है। जब बुंदेलखंड सामंती शोषण का शिकार था, तब गरीब ठाकुरों के परिवार भी शोषण के शिकार हुए थे। इसलिए इसे किसी एक जाति से जोड़कर समाजवादी पार्टी इसका लाभ उठाने की कोशिश न करे। क्योंकि, मैं अखिलेश और मुलायम के परिवार की व्यवस्था को भी सामंतवादी व्यवस्था मानती हूं। सामंतवाद का सबसे ज्वलंत उदाहरण तो स्वयं मायावती हैं। वह भी ठाकुर जाति से नहीं हैं। मैंने बुंदेलखंड में सामंती सोच के खिलाफ हमेशा संघर्ष किया है। यह आगे भी जारी रहेगा।