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विधान भारतीय संस्कृति एवं पुरातत्व की विलक्षण धरोहर है नवागढ़

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विधान भारतीय संस्कृति एवं पुरातत्व की विलक्षण धरोहर है नवागढ़
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प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ में मनायी गई क्षमावाणी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। महरौनी विकासखंड अंतर्गत सोजना के पास स्थित प्रागैतिहासिक श्रीदिगंबर जैन अतिशय नवागढ़ क्षेत्र में ब्रह्मचारी जयपुर निशांतजी के निर्देशन में क्षमावाणी का आयोजन और विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर प्रागैतिहासिक नवागढ़ का पुरावैभव पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
सर्वप्रथम बृहस्पतिवार की सुबह मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के साथ अरनाथ महामंडल विधान भक्ति श्रद्धा से आयोजित किया गया, जिसमें यह विधि विधान पंडित मनीष जैन टीकमगढ़, बृजेश शास्त्री ,पंडित शोभालाल, इंद्रकुमार ककरवाहा आदि विद्वानों ने संपन्न कराया। इसके बाद जैन युवा जागृति संघ नवागढ़ के तत्वावधान में क्षमावाणी कार्यक्रम का आयोजन डॉक्टर सचान एवं सुनील वैद्य के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया। यहां क्षेत्रीय समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने एक-दूसरे से जाने अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए सभी से क्षमा मांगी। समिति ने निर्णय लिया कि यहां पर एक निशुल्क औषधालय खोला जाए , जिससे ग्रामवासियों को आपातकाल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके लिए वरिष्ठ डॉक्टर कोमल चंद अजनोर से निवेदन किया गया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की। कला संपदा का अक्षय भंडार समेटे नवागढ़ में हैं, पर्यटन की असीम संभवनाएं जय निशांत नवागढ़ तीर्थक्षेत्र के निर्देशक जयकुमार निशांत ने विश्व पर्यटन दिवस पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इस प्रागैतिहासिक नवागढ़ में प्राप्त कलाकृतियां एवं पुरावशेष निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति एवं इतिहास की विलक्षण धरोहर है। नवागढ़ के फाइटऑन पहाड़ी में स्थित गुफाओं में सर्वेक्षण किये जाने पर प्राप्त सामग्री व अन्य साक्ष्यों के आधार पर लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व नवागढ़ के इतिहास होने की जानकारी प्राप्त होती है। यहां चट्टानों पर प्राचीन शैल चित्र भी प्राप्त हुए जिनमें विशेष रूप से जैन तीर्थकर के भी चित्र और शिलालेखयुक्त प्राचीन जैन प्रतिमाएं व मंदिर के अवशेष प्राप्त होना जैन धर्म के अतिप्राचीन समय से होना दर्शाता है। प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय ने का कि यह क्षेत्र प्राचीन पुराकाल से लेकर आज तक निरंतर विशेषताओं के लिए हुए है। यहां हो रहे निरंतर अनुसंधान से सभी प्रकार के पुरावशेष उपलब्ध हो रहे हैं। नवागढ़ क्षेत्र में कई रहस्य छिपे हुए हैं। चंदेल बावड़ी ,बगाज टोरिया, फाईटोन, जैन पहाड़ी न जाने कितने प्रकार के कला आयाम यहां प्राप्त होते हैं। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने भी क्षेत्र का अवलोकन कर इसे अति प्राचीन बताया था तथा इसके विकास के लिए निरंतर अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिए। क्षेत्र के अध्यक्ष अधिवक्ता सनत जैन बताते हैं कि क्षेत्र पर एक सर्व सुविधा युक्त धर्मशाला और एक संग्रहालय का निर्माण किया गया है। इस संग्रहालय में कला के महत्वपूर्ण और दुर्लभ नमूनों को सुरक्षित रखा गया है।
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नेकोरा के पूर्व ग्राम प्रधान वीरचंद्र जैन और अशोक मैनवार ने कहा कि नवागढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से पूर्ण है। इस क्षेत्र के गौरवशाली और सुंदर अतीत से पता चलता है, कि यह स्थान कला के प्राचीन सुंदर प्रतीकों से भरा हुआ है।क्षेत्र के महामंत्री योगेंद्र जैन ने कहा कि आज भारतीय संस्कृति इतिहास एवं पुरा संपदा के संरक्षण एवं साक्ष्यों के रुप में विख्यात हो रहा। उमेश जैन और सोमचंद्र जैन ने कहा कि इस अति प्राचीन क्षेत्र पर पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। इसके समुचित विकास के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए। क्षेत्र अध्यक्ष सनत कुमार एडवोकेट ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। संचालन पूर्व प्रधान वीरचंद्र नेकोरा ने किया। क्षेत्र के महामंत्री योगेंद्र जैन बबलू ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन में लुहर्रा, मैनवार, सोजना, नेकोरा, महरौनी, टीकमगढ़, ककरवाहा, बड़ागांव, मड़ावरा,सापोन, अंतौरा, डुंडा, हैदरपुर,उमरी,अंतोरा,पठा, समर्रा आदि अनेक स्थानों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान कैलाश ककरवाहा, अशोक कपासिया मड़ावरा, बाबूलाल घुवारा, अशोक मैनवार,चंद्रभान डूंडा, कपूर चंद डूंडा, आनंदी लाल लुहर्रा, शिखर चंद अजनोर, वीरेंद्र सापोन, सुरेंद्र सोजना, आनंद सोजना, राजकुमार चुना, बबलू बड़ागांव, उमेश जैन, सोमचंद्र जैन आदि उपस्थित रहे।
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