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बदहाली की कहानी ब्यां कर रहा सांसद आदर्श गांव पारौल

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बहाली की कहानी ब्यां कर रहा सांसद आदर्श गांव पारौल
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आदर्श ग्राम होने के बाद भी नहीं हो पा रहा विकास
सहरिया आदिवासियों को नहीं मिले आवास, सड़कें खराब
अमर उजाला ब्यूरो
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती द्वारा गोद लिए ग्राम पारौल विकासखंड मड़ावरा की तस्वीर नहीं बदल सकी है। महीनों बीतने के बाद भी गांव की सड़कें खस्ताहाल अवस्था में हैं। अधिकतर सड़कों पर जलभराव है या फिर कीचड़ से सनी हैं। यही नहीं, दर्शनीय स्थल पंडवन के मार्ग का भी बुरा हाल है। यहां ट्रैक्टर ट्राली से ही पहुंचा जा सकता है। वहीं, सहरिया आदिवासी आवास नहीं मिलने से मायूस हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी सांसदों से पिछड़े गावों का विकास करने के लिए उन्हें गोद लेने की इच्छा जाहिर की थी। क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने जिले का ग्राम पवा गोद लिया था। इसके उपरांत दूसरा गांव पारौल चुना है। इस गांव में करीब तीन हजार मतदाता हैं। उन्होंने पारोल गांव को आदर्श बनाने का बीड़ा उठाया है। लेकिन मौजूदा परिदृश्य कुछ और ही कहानी कह रहा है। महीनों बीतने के बाद भी उनके गोद लिए ग्राम की अधिकतर सड़कों पर पानी भरा है या फिर कीचड़ से सनी हैं। गांव में जगह-जगह गंदगी फैलीं है। इन्हीं गलियों में ग्रामीण शौचालय के अभाव में खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। इससे संक्रमित बीमारी फैलने भय बना हुआ है। सहरिया आदिवासियों को आवास नहीं मिल पाए हैं। सहरिया लोग आज भी झोपड़ियों में रहकर गुजारा कर रहे हैं। जानवरों के लिए घरों के सामने झागङ बारी लगाए हुए हैं, ऐसे में बरसात के दिनों में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग आवास, शौचालय, सड़क, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य बिजली जैसी सुविधाओं से काफी दूर हैं। उन्हें आज भी गांव का विकास होने का इंतजार है। फरवरी माह में डीएम मानवेंद्र सिंह ने जनचौपाल व गांव भ्रमण किया था। इस दौरान विद्यालयों में गंदगी व स्वास्थ्य सेवाएं ठप मिली थी। इस पर उन्होंनेे व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इसके एक माह बीतने के बाद भी गांव की हालत जस की तस बनी हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र अभी तक चालू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रसव के दौरान मड़ावरा अस्पताल ले जाना पङता है, ऐसे में दिक्कतों का सामना करना पड़ हैं। गांव में शमशान घाट नहीं होने से अगर बरसात में किसी मृत्यु हो जाती हैं तो दाह संस्कार के समय पर काफी परेशानी होती है।
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जंगल के किनारे बसे गांव पारौल का चयन सांसद आदर्श ग्राम योजना में हुआ है। यहां की मतदाता संख्या करीब तीन हजार है। विधानसभा चुनाव दौरान यहां के लोगों ने गांव के विकास का मुद्दा बनाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया था। दस महीने से विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं और गांव की हालत हालत जस की तस बनी हुई है।
कैलाश माते

जब आदर्श ग्राम घोषित हुआ तो उस समय गांव में एक ख़ुशी की लहर दौड़ गयी ग्रामीणों को आस जगी थी कि अब गांव का विकास होगा सङक आवास शौचालय नाली स्वास्थ्य सेवाएं शिक्षा का कार्य में गांव की उन्नति होगी लेकिन गांव का विकास कागजों में सिमटता दिखाई दे रहा है लोगों की उम्मीदो में पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
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चन्द्रभान कुशवाहा
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पहले जैसा अब भी है गांव
विकास के नाम पर लीपा पोती हो रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि लोगों को मूलभूत सुविधाओं का अभी तक इंतजाम नहीं हो पाया है।
सरकार भले ही गरीब परिवारों की सहायता के लिए तमाम योजनाए चला रही हो लेकिन यहाँ किसी गरीब को लाभ नहीं मिल रहा है।
कुन्जन सिंह
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पारौल गांव के सर्वांगीण विकास के लिए प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि किन योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हुआ है। ऐसी योजनाओं को चिह्नित करते हुए पात्रों को लाभान्वित किया जा रहा है।
प्रदीप चौबे
सांसद प्रतिनिधि
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