मां ममता और समर्पण की मिशाल
मदर्स डे पर आयोजित की गई विचार गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
मां का बच्चे से रिश्ता दुनिया में किसी भी रिश्ते से नौ माह पुराना होता है, मां ममता और समर्पण की मिशाल होती है। मदर्स डे पर प्रभावना जनकल्याण परिषद एवं दिगंबर जैन स्वस्ति महिला महासमिति की संयुक्त विचार गोष्ठी में लोगों ने अपने विचार रखे।
रविवार को मदर्स डे पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि भगवान की वह अनोखी रचना, जो निस्वार्थ भाव से पालन करती है। हमारे साथ कभी हंसती तो कभी रोती है। ममता जैन ने कहा कि हमारी मां हमारे लिये सुरक्षा कवच की तरह होती है क्योंकि वो हमें सभी परेशानियों से बचाती है। संचालन कर्ता प्रियंका जैन ने कहा कि मातृ-दिवस हर साल मां और उसके मातृत्व को सम्मान तथा आदर देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के लिये मां को खासतौर पर उनके बच्चों के स्कूलों में आमंत्रित किया जाता है। इस दिन मां अपने बच्चों के स्कूल जाती है और इस उत्सव में शामिल होती है। पलक जैन ने इन पंक्तियों के माध्यम से अपने विचार रखे कि हर धूप की तपिश में, अपने आंचल की छाया देती है। मीठी-मीठी प्यार भरी बातों से, हमेशा थकान मिटाती मां। उन्होंने कहा कि मां के पास ढेर सारी जिम्मेदारियां होती हैं वो उसको लगातार बिना रुके और थके निभाती है। कवयित्री मोहनी जैन महक ने कहा कि हमारा जीवन मां के उन उपकारों से भरा है, जिनकी कीमत कभी नहीं चुकाई जा सकती है। डॉ. नेहा जैन ने कहा कि हर रिश्ता जिंदगी में एक खास अहमियत रखता है, लेकिन एक रिश्ता ऐसा है जो सब रिश्तों से अनमोल है, वो है मां और बच्चे का रिश्ता। कहते हैं कि भगवान हर जगह नहीं पहुंच सकते इसलिए उसने हर घर में मां को अपने रूप में भेजा है। प्रीति जैन ने कहा कि अन्य त्योहारों और दिवस की तरह मदर्स डे को भी हर साल मनाया जाता है। इस बार 13 मई को मदर्स डे है। संगीता जैन ने कहा कि कहते हैं भगवान हर जगह मौजूद नहीं रह सकता है इसलिए उसने मां को बनाया है। दूसरे शब्दों में कहें तो मां धरती पर भगवान का प्रतिरूप ही है। वह न सिर्फ अपने बच्चों की देखभाल करती है, मां का हर सफलता के पीछे हाथ होता है। इस दौरान ममता जैन, प्रियंका जैन, पलक जैन, प्रीति जैन, मोहनी जैन, डॉ. नेहा जैन, संगीता जैन मौजूद रहीं।