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हैदराबाद के छात्र दल ने देवगढ़ में देखा गुप्त चंदेलकालीन शिल्प सौंदर्य

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छात्रों ने देवगढ़ में देखा चंदेलकालीन शिल्प
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बुंदेलखंड की प्राचीनता देखने को निकला हैदराबाद के विद्यार्थियों का दल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पर्यटन स्थलों के भ्रमण और तीर्थों के दर्शन अवलोकन के लिए श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन गुरुकुल हैदराबाद (तेलंगाना) के 50 छात्रों का एक दल ललितपुर पहुंचा। उन्होंने देवगढ़ में पहुंचकर चंदेलकालीन पुरा संपदा को देखा और यहां के इतिहास को जाना। नगर आगमन पर ललितपुर स्टेशन पर प्रभावना जनकल्याण परिषद (रजि.) और करुणा इंटरनेशनल के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत भव्य किया गया।
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तेलंगाना प्रांत के हैदराबाद शहर के गुरुकुल में अध्ययनरत छात्रों के इस दल में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार आदि प्रांतों के निवासी छात्र पर्यटन स्थलों के भ्रमण और तीर्थों के दर्शन अवलोकन के लिए छात्रावास अधीक्षक शैलेंद्र शास्त्री और अभिषेक जैन हैदराबाद के निर्देशन में यात्रा पर निकले हुए हैं। शनिवार को इन छात्रों का यह दल देवगढ़ पहुंचा। जहां सभी छात्रों ने यहां 300 फुट उंचाई पर वनाच्छादित विंध्य पर्वत पर स्थित 41 जैन मंदिर के विशाल और अति प्राचीन मंदिर समूह का अवलोकन किया और बारीकी से शिल्प सौंदर्य को देखा। यह छात्र गुप्तकाल एवं उसके परवर्ती गुर्जर प्रतिहार, चंदेल कालीन शिल्प सौंदर्य के अद्भुत संगम को देख अभिभूत हो उठे। पंचायतन शैली में निर्मित भगवान शांतिनाथ की विशाल प्रतिमा को देखने और दर्शन के लिए छात्र काफी उत्साहित दिखे। यहां छात्रों ने पहाड़ी के नीचे स्थित पूरे देश में प्रसिद्ध उपाध्याय परमेष्ठी के दृश्य अपने कैमरे में कैद किए। गुप्तकालीन कला का प्रतिनिधि स्मारक दशावतार मंदिर में भारतीय शिल्प में क्रियाशीलता, मौलिक मुख संघटना, सज्जा तत्वों के अपूर्व संगम को देखकर छात्रों का दल अचंभित हो गया। अन्य स्थानों का अवलोकन कर अपनी विरासत से परिचित हुए। इस दौरान डॉ. सुनील संचय ने छात्रों के दल को बताया कि जहां विंध्य पर्वत माला पर 41 जैन मंदिर गौरवशाली इतिहास के जीते-जागते प्रमाण हैं, वहीं प्रख्यात दशावतार मंदिर अपने अनूठे शिल्प की दास्तान कहता है। पर्वतमाला के दक्षिण में सिद्ध की गुफा, राजघाटी, बौद्ध गुफा, जैन गुफा आदि बेतवा नदी के किनारे स्थित सुंदर प्राकृतिक तथा पुरातत्व स्थल है। यहां महत्वपूर्ण अभिलेख, प्रशस्तियों का खजाना है। छात्रवास अधीक्षक शैलेंद्र शास्त्री और अभिषेक जैन हैदराबाद ने बताया कि छात्रों को अपनी प्राचीन विरासत, शल्पि कला, पुरावैभव आदि गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के उद्देश्य से वे छात्रों का दल लेकर बुंदेलखंड के भ्रमण पर निकले हुए हैं। देवगढ़ से वहसिरोन जी, चंदेरी, गोलकोट होते हुए खजुराहो पहुंचेंगे जहां पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराजके स्वदेशी अभियान के अंतर्गत चलाये जा रहे हथकरघा के अभियान में शिरकत करेंगे साथ ही खजुराहो के मंदिरों की अद्भुत कलाकारी, नक्काशी, सौंदर्य से परिचित करायेंगे। हैदराबाद में उक्त छात्रावास में विभिन्न राज्यों के छात्र आकर के शहर में स्थित उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों शिक्षा ग्रहण करते हैं। देवगढ़ को देखने के बाद अंकित फिरोजाबाद और राजस्थान के सांगबाड़ा निवासी रजत ने बताया कि देवगढ़ की प्राचीन कला बहुत कुछ कहती प्रतीत होती है। गया बिहार के श्रेयांस और मध्यप्रदेश के बम्होरी के अजय बताते हैं कि सचमुच यथानाम तथागुण है देवगढ़। फिरोजाबाद के अंकित और महाराष्ट्र के समकित ने कहा कि यह सुरम्य, चित्ताकर्षक, प्राकृतिक सौंदर्ययुक्त विश्व की अमूल्य धरोहर है। जबलपुर के संभव, ललितपुर के देवांश, सोमचंद्र, मड़ावरा के हर्ष, बिहार के सचिन, बांसवाड़ा राजस्थान के धवल, जयपुर के संभव ने भी अपने अनुभव बताते हुए देवगढ़ को हमारी सांस्कृतिक परंपरा की अनूठी, बेमिशाल धरोहर बताया। इस यहां प्रबंधक मोदी पंकज जैन पार्षद, राजेन्द्र जैन, अखिलेश गदयाना, अमितप्रिय जैन, अक्षय अलया, अजय जैन शास्त्री, भगवानदास जैन कैलगुवा, विनोद कामरा आदि ने छात्रों के दल का स्वागत किया और यहां की प्राचीन धरोहरों की जानकारियां भी दीं।
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