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पितृ पक्ष शुरु, पुरखों को याद कर कुश से किया तर्पण

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पितृ पक्ष शुरु, पुरखों को याद कर कुश से किया तर्पण
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शुभ कार्यों पर भी 15 दिनों को लगा विराम, पूर्वजों का होगा श्राद्घ
सुम्मेरा तालाब पर पहुंचकर लोगों ने पूूर्वज को दिया पानी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सनातन धर्म में भाद्र पद की पूर्णिमा से पंद्रह दिनों तक पूर्वजों का दिन माना जाता है, जो मंगलवार से पितृ पक्ष के रूप में शुरू हो गया है। लोगों ने अपने-अपने पूूर्वजों को याद कर सुम्मेरा तालाब या फिर अन्य जल स्रोतों में पुरखों को याद कर उन्हें पानी देकर कुश के साथ तर्पण किया। पितृ पक्ष शुरू हो जाने से आगामी पंद्रह दिनों के लिए शुभ कार्यों पर भी विराम लग गया है। अब कोई भी शुभ कार्य नवरात्रि शुरु होने के साथ ही प्रारंभ होंगे।
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सोमवार के दिन से ही भाद्र पद की पूर्णिमा होने के कारण पितृ पक्ष शुरू हो जाते हैं, लेकिन मंगलवार को भी भाद्रपद की पूर्णिमा सुबह के समय तक मानी गई, जिसके चलते मंगलवार से भी पितृ पक्ष का शुभारंभ माना गया है। पितृ पक्ष शुरु होते ही सनातन धर्मियों द्वारा परंपरा अनुसार अपने-अपने पूर्वजों को मृत्यु उपरांत याद करते हुए उन्हें पानी दिया जाता है। अपने पुरखों को याद करने के लिए पहले तालाब या नदी या फिर अन्य जल स्रोतों के पास तिल, उड़द आदि हाथों में लेकर कुश से पानी दिया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक का समय श्राद्घ या महालय पक्ष कहलाता है। इस अवधि के 16 दिन तक पितरों का यानि श्राद्घ कर्म के लिए विशेष रुप से निर्धारित किए गए हैं। यही अवधि पितृ पक्ष के नाम से जानी जाती है। पितृ पक्ष में किए गए कार्यों से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होना माना जाता है। श्राद्घ पक्ष का संबंध मृत्यु से होता है। इस पितृ पक्ष की अवधि में पितृ अपने परिजनों द्वारा किए पितृ कर्मों से सबसे करीब माने जाते हैं। श्राद्घ पक्ष में लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए कौआ, श्वान और गाय के नाम का भोजन भी अलग से पात्रों में निकालकर खिलाते हैं। गाय में देवताओं का वास माना गया है जबतिक कौआ और श्वान को पुरखों का रुप माना गया है, इसलिए पितृ पक्ष के दौरान गाय, कौआ और श्वान को ग्रास दिया जाता है। अब श्राद्घ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के दिन ही कर्मकांडी ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं। जिसके चलते इन दिनों में ब्राह्मणों को श्राद्घ के दिनों में महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है, जब उनके लिए लोग अपने घर पुरखों की शांति के लिए ब्रह्म भोज पर आमंत्रित करते हैं। कुछ इसी प्रकार दिन दिनों सनातन धर्मी परिवारों में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्घ पक्ष में तर्पण और अन्य कर्मकांड किए जा रहे हैं।
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