नए शैक्षिक सत्र में भी निजी विद्यालयों की मनमानी
फीस बढ़ाई और कइयों ने पाठ्यक्रम भी बदला
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नया शैक्षिक सत्र प्रारंभ होते ही अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों ने अभिभावकों की जेब ढीली करने के तरीके खोज निकाले हैं। कई स्कूलों ने फीस में बढ़ोत्तरी कर दी है तो कइयों ने पाठ्यक्रम में बदलाव कर दिया है। स्कूल विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए एनसीआरटी की चंद किताबें ही चला रहे हैं। इस तरह अभिभावकों का अप्रैल माह में बजट गड़बड़ा गया है।
नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो गई है। अभिभावकों ने सोचा था कि इस बार योगी सरकार में स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। लेकिन यह सब हवा हवाई साबित हुआ। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों ने बिना किसी भय के मनमानी शुरू कर दी है। कई विद्यालयों ने फीस में बढ़ोत्तरी कर दी है तो कई स्कूलों में पाठ्यक्रम बदल दिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि गत वर्ष भी स्कूलों ने पाठ्यक्रम बदले थे। जहां तक एनसीआरटी की किताबें चलाने की बात है तो एक दो किताबों को ही पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसके विपरीत प्रबंधक तर्क दे रहे हैं कि बाजार में एनसीआरटी की किताबें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी किताबें चलाने में दिक्कत आ रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि एनसीआरटी की किताबों में कमीशन जैसा खेल संभव नहीं हो पा रहा है। गत शैक्षिक सत्र में अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रबंधकों से शपथ पत्र लिए गए थे, जिनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने पलटकर विद्यालयों का मुंह नहीं देखा। अब जब अभिभावकों में असंतोष नजर आने लगा है तो अधिकारी एक बार फिर शपथ पत्र की चर्चा करने लगे हैं। लेकिन निजी स्कूलों की मनमानी पर किस हद तक अंकुश लग पाता है यह तो आने वाले दिनों में पता चल सकेगा।
विद्यालयों का होगा निरीक्षण
विद्यालयों में पहुंचकर शुल्क, यूनिफार्म, पाठ्यक्रम का सत्यापन किया जाएगा। यदि मनमानी उजागर होती है तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
ब्रजेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नगर
अभिभावक कर सकते हैं शिकायत
यदि किसी स्कूल ने शुल्क में बढ़ोत्तरी कर दी है या पाठ्यक्रम बदल दिया है तो वह नगर संसाधन केंद्र में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। खंड शिक्षा अधिकारी ब्रजेश सिंह का कहना है कि अभिभावकों की शिकायतों को पूरी गंभीरता से लिया जाएगा।