जिले में चार दशक बाद भी नहीं बेहतर यातायात की सुविधा
ललितपुर। जिला बनने के चार दशक बाद भी जिले के लोगों को सुगम यातायात की सुविधा नहीं मिल पाई है। यहां आज भी कई मार्गों पर दिन में केवल एक ही बस संचालित की जा रही है। कुछ मार्ग ऐसे भी हैं, जहां बसें नहीं चलाई गईं हैं। ऐसे में मजबूरन लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेकर जान जोखिम में डालकर यात्रा करना पड़ रही है।
झांसी जिले में वर्ष 1974 तक ललितपुर भी शामिल रहा। 1975 में ललितपुर नया जिला बनाया गया। जनपद को अस्तित्व में आए लगभग चार दशक से अधिक समय बीत गया है। इसके बाद भी जिले में बेहतर यातायात सुविधाओं का अभाव है। यहां कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक वाहन से आने जाने की सुविधा नहीं है। कई मार्गों पर 24 घंटे में एक ही बस चल रही हैं। तो कई मार्ग ऐसे भी हैं, जहां पर एक भी बस नहीं है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शहर क्षेत्र व मुख्यालय पर आने के लिए बसों का घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार एक ही बस होने के कारण बस शादी विवाह में जाने व बस खराब होने की स्थिति में अपने रूट पर नहीं चल पाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग घंटों इंतजार के बाद बस नहीं आने पर मायूस होकर लौट जाते हैं।
वहीं, परिवहन विभाग द्वारा जिले में यातायात की सुविधा देने के लिए निजी बसों को परमिट जारी किए गए हैं। 91 बसों को ग्रामीण क्षेत्रों में चलने के लिए और 74 परमिट अंतर क्षेत्रीय जारी किए गए हैं। साथ ही इनके चलने के लिए अलग-अलग स्थानों से चलने का समय तय किया गया है। बसों के गंतव्य तक पहुंचने का भी समय दिया गया है। विभाग को बस की स्थिति खराब होने व नहीं चलने की सूचना दी जाती है। लेकिन, कई निजी बस संचालक नियमों को ताक पर रखकर अपने मनमाने तरीके से बसों का संचालन कर रहे हैं। बसों की कमी के कारण सवारियों को ठूंस कर यात्रा करा रहे हैं तो अधिक कमाई के चक्कर में सवारियों की जान जोखिम में डाल कर बस की छतों व दरवाजों पर लटका कर यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में कई बार दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा
निजी बसों की जांच कर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें अपने रुट तक न पहुंचने वाली बसों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सत्येंद्र कुमार
सहायक परिवहन अधिकारी
खटारा बसें भी दौड़ रहीं
जिला मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संचालित की जा रही कुछ बसें अनफिट स्थिति में दौड़ रहीं है। जिसके चलते दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। कई बार दुर्घटनाएं हो चुकीं है।
वर्तमान में परिवहन निगम बसों की स्थिति
वर्तमान में परिवहन निगम झांसी डिपो द्वारा 12 बसों का संचालन किया जा रहा है। जबकि, शुरुआत में लगभग तीस बसों की स्वीकृति दी गई। जो धीरे-धीरे कम होती गईं।
चार वर्ष बीतने के बाद भी नहीं हो सका डिपो का निर्माण
मुख्यालय के समीपवर्ती ग्राम रोड़ा में रोडवेज डिपो के लिए जमीन चिह्नित कर इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन चार वर्ष बाद भी भवन का निर्माण आधा-अधूरा पड़ा है। इससे लोगों को यातायात की सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। जिला मुख्यालय पर अंतर रज्जीय बस स्टैंड बना है, लेकिन यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। यहां बैठने के लिए यात्री शेड पर्याप्त नहीं है। बस स्टैंड पर आने वाली रोडवेज की बसों को जगह नहीं मिलने के कारण बाहर ही खड़ा होना पड़ता है। यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए 2015 में तत्कालीन सरकार ने ग्राम रोड़ा में सात एकड़ जमीन को उत्तर प्रदेेश परिवहन निगम का डिपो व कार्यशाला की सौगात दी। डिपो को जनवरी 2018 में बन कर तैयार होना था, लेेकिन इसका निर्माण कार्य तय समय अवधि में पूरा नहीं किया गया। निर्माण की अगली तिथि बढ़ाकर मार्च 2019 कर दी गई, लेकिन लगता नहीं है कि निर्माण पूरा हो जाएगा। इस संबंध में परिवहन निगम डिपो के अवर अभियंता हरीओम वर्मा ने बताया कि रोडवेज डिपो निर्माण में मुख्य भवन का काम पूरा हो गया है। इसमें गेट व वायरिंग का काम बाकी रह गया है। कैंटीन, डीजल शेड और वर्कशाप का कार्य अधूरा पड़ा है। इसके निर्माण में हाइटेंशन लाइन बाधा बनी हुई है। हाईटेंशन लाइन हटते ही कार्यशाला का निर्माण किया जाएगा। जमीन में पत्थर व मिट्टी होने के कारण इसका रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया है। अवर अभियंता के मुताबिक डिपो का पूरा निर्माण जून में हो जाएगा।