जिला पंचायत के हाथ से निकला पुराना कोतवाल आवास
पुलिस प्रशासन के हक में हुआ स्वामित्व का निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। घंटाघर से सदरकांटा तिराहे पर स्थित पुराना कोतवाल आवास पर स्वामित्व के हक का निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश हरकेश कुमार की अदालत ने पुलिस के पक्ष में दिया है। जिला पंचायत के पक्ष में दिए गए पूर्व के निर्णयों को निरस्त करते हुए न्यायालय ने पुलिस प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल इंद्रपाल सिंह यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली की ओर से घंटाघर से सदरकांटा तिराहे पर बना पुराना कोतवाली आवास की संपत्ति के स्वामित्व के मामले में 18 सितंबर 2008 के अवर न्यायालय के जिला पंचायत के हक में दिए गए आदेश के विरुद्घ न्यायालय में अपील दाखिल की गई थी। जिसमें बताया गया था कि वह उक्त विवादित संपत्ति पर सदैव स्वामी के रुप में काबिज व दखील चल आते हैं। कभी भी विपक्षी जिला पंचायत के लाइसेंसी नहीं रहे हैं और न ही कोई लाइसेंस उनके द्वारा उन्हें दिया गया है। उनका और विपक्षियों का संबंध लाइसेंसी व अनुमतिदाता का नहीं है। विपक्षी द्वारा अवर न्यायालय में उक्त विवादित संपत्ति के मामले में एक दीवानी वाद जिला परिषद बनाम उत्तर राज्य आदि कब्जा दखल प्राप्त करने के लिए न्यायालय मुंसिफ में दायर किया गया था जो 17 अक्टूबर 1994 को डिक्री हुआ था। जिसके विरुद्घ दीवानी अपील उत्तर प्रदेश राज्य आदि बनाम जिला परिषद आदि प्रस्तुत की गई थी। जो अपीलीय न्यायालय अपर जिला जज ललितपुर द्वारा 31 अगस्त 1998 को सव्यय स्वीकार की गई थी और निर्णय में विवादित संपत्ति का स्वामी जिला पंचायत को नहीं माना। इसके साथ ही मूलवाद में पारित डिक्री को निरस्त करके विपक्षी का वाद खारिज कर दिया। इसके विरुद्घ कोई अपील न होने से उक्त अपील का निर्णय पक्षकारों पर बाध्यकारी है एवं विपक्षी प्राणन्याय के सिद्घांत से बाधित हैं। अपील में बताया गया कि उक्त संपत्ति में भवन व कुआं पुलिस विभाग द्वारा निर्मित कराया गया है और उस संपत्ति पर एक मात्र स्वामी पुलिस विभाग है। आरोप लगाया गया कि अवर न्यायालय में अविधिक रुप से निर्णय पारित किया है, जो बाध्यकारी नहीं है। अवर न्यायालय में जो कार्यवाही धारा 4(1) उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमिसेज एक्ट के आधार पर दायर की गई है, उसमें कोई साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के बावजूद गलत ढंग से 27 जुलाई 2000 के फ्रीहोल्ड विलेख को आधार बनाकर प्रश्नगत निर्णय पारित किया गया है, जो विधि विरुद्घ है। और इसी आधार पर 18 सितंबर 2008 को निरस्त करने की अपील की गई। जिला पंचायत द्वारा उक्त संपत्ति पर अपना स्वामित्व बताती चली आ रही है। जिसके पक्ष में वर्ष 2008 में यह निर्णय दिया गया था। उक्त निर्णय के विरुद्घ दायर अपील पर जिला सुनवाई करते हुए पेश की दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने पुलिस प्रशासन के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए वर्ष 2008 में अवर न्यायालय के आदेश निरस्त करते हुए मुकदमा में व्यय खर्चा पाने का अधिकारी माना और उक्त पुराना कोतवाल आवास को पुलिस प्रशासन का स्वामित्व माना है।