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गोविंद सागर बांध, फिर भी शहर वासी प्यासे

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प्यास बुझाने के लिए 35 साल और कीजिए इंतजार!
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सुनील सुल्लेरे
ललितपुर। आप, आपके बच्चे मीलों दूर से पानी लाएं, जानवर प्यासे रह जाएं और खेत बंजर हो जाएं... व्यवस्था की बला से। यह विडंबना उस ललितपुर की है जहां कई बांध हैं। आबादी के साथ पानी की मांग भी बढ़ती जा रही है। इसके विपरीत बांधों की क्षमता हर साल कम होती जा रही है। शहर के मुहाने पर गोविंद सागर बांध पैंसठ साल से अधिक पुराना है। कोई सरकारी आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन जानकारों का कहना है कि साल दर साल बांध में सिल्ट भरने से इसकी क्षमता आधी से कम रह गई है। आज तक सिल्ट सफाई नहीं हुई है। सरकारी अमला रटा रटाया सा जवाब दे रहा है कि जो भी होगा बांध के सौ साल पूरे होने पर होगा। इन सौ वर्षों में पानी की पर्याप्त आपूर्ति कैसे होगी इस पर वे खामोशी ओढे़ हैं। नगर पालिका अध्यक्ष के अनुसार पानी की किल्लत विकराल होती जा रही है।
उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने 1952 में गोविंद सागर बांध का शुभारंभ किया था। शहजाद नदी पर बना बांध साइफन प्रणाली पर आधारित है। बांध की क्षमता 96.80 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की है। बांध शहर के किनारे पर बसा है। शहर की आबादी लगभग पांच लाख है। बांध से 12.35 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी पेयजल के लिए निर्धारित किया गया है। बाकी पानी सिंचाई के लिए सुरक्षित है। एक समय था, जब पानी भरपूर आता था। दूसरी और तीसरी मंजिल पर भी आसानी से पानी पहुंच जाता था, लेकिन अब किसी क्षेत्र में दस मिनट तो किसी क्षेत्र में बीस मिनट के लिए ही पानी आता है। कभी ललितपुर के निवासी पानी पर नाज करते थे, लेकिन आज स्थिति यह है कि यहां पर भी पानी की त्राहि-त्राहि मची हुई है। खासकर मोहल्ला रैदासपुरा, कर्माबाई नगर, गोविंद नगर, नारायणपुरा, नदीपुरा आदि मोहल्लों में पानी का संकट रहता है।
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सिल्ट जमा होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। विभाग का मानना है कि किसी भी बांध में सिल्ट जमा होने के बाद भी बांध की उम्र सौ साल होती है। यानी, सौ साल तक बांध काम तो करता रहेगा, लेकिन बांध में पानी की क्षमता कम हो जाएगी। गोविंद सागर बांध की भी यही स्थिति है। अब तक बांध की सिल्ट साफ करने के लिए कोई प्रावधान तैयार नहीं किया गया है। हालांकि, यह प्रक्रिया भी काफी कठिन है। क्योंकि बांध के आगे समानांतर बांध तैयार किया जाता है, इसके बाद ही उसकी सिल्ट साफ हो सकती है।

नेहरू नगर क्षेत्र है अछूता
अभी नेहरू नगर क्षेत्र में बांध के पानी की आपूर्ति नहीं होती है, क्योंकि, इस क्षेत्र में पानी की पाइप लाइन नहीं डाली गई है। इसमें चांदमारी, सदनशाह और नेहरू नगर क्षेत्र शामिल हैं।

बांध से रेलवे और शहर को पीने का पानी दिया जा रहा है। बांध में पीने के लिए पानी की कोई कमी नहीं है। साल भर में 12.35 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होती है और इतना पानी रोककर रखा जाता है। जहां तक सिल्ट की बात है तो इसके लिए सौ साल का प्रावधान है। अभी बांध 65 साल हुए हैं। सौ साल के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
- मनमोहन सिंह, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड


वक्त रहते गोविंद सागर बांध की सफाई नहीं हुई तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे। प्यासे लोग बांध की उम्र पूरी होने का 35 साल इंतजार नहीं कर सकते। सिंचाई विभाग को कोई विकल्प निकालना ही होगा।
- रजनी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष

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बांध में पानी दिनोंदिन कम होता जा रहा है। दो साल पहले तक नहर के माध्यम से जानवरों को पीने का पानी मिलता था, लेकिन अब यह बंद कर दिया गया है। इससे पता चलता है कि पानी की कमी है।
- भुजवल
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यदि जानवरों को पानी का इंतजाम किया गया होता तो एक से दो फिट तक और बांध खाली हो जाता। लेकिन, जानवरों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस कारण बांध पर ही पानी पिलाने के लिए जानवरों को लाना पड़ता है।
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- प्रीतम
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- अगर फसल की जल्दी बुवाई हो जाती है तो पानी कम खर्च होता है, यदि फसल में देरी हो गई तो पानी अधिक खर्च करना पड़ता है। इसी बांध के पानी के भरोसे खेती करते हैं।
- दशरथ
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