सूचना आयुक्त ने बीएसए पर लगाया 25 हजार जुर्माना
ललितपुर। उर्दू अध्यापकों की भर्ती बेसिक शिक्षा अफसरों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। जहां जिलाधिकारी ने उर्दू अध्यापक भर्ती पर जांच बैठा रखी है, वहीं कुछ लोग इसके प्रपत्र जुटाने में लगे हैं। ऐसे ही एक मामले में आवेदक को मांगी गई सूचना नहीं देने पर राज्य सूचना आयुक्त ने बीएसए के विरुद्ध 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
वर्ष 1995-96 से अब तक उर्दू अध्यापकों की कई भर्तियां हो चुकी हैं। शुरुआती भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई स्तर पर गड़बड़ी होने के आरोप लग रहे हैं। इनकी जांच की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन विभागीय अफसर इससे बचते रहे हैं। बीते माहों में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह के समक्ष उर्दू भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत हुई तो उन्होंने एडीएम की निगरानी में जांच कमेटी गठित कर दी। जांच लंबी खिंचते देख कुछ लोगों ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत इसके कागजात जुटाने आरंभ कर दिए हैं, जिससे कि जांच में कोई लीपापोती नहीं हो सके। कचहरी क्षेत्र के पास रहने वाले आरिफ वेग ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 1997 में नियुक्त बारह उर्दू सहायक अध्यापक भर्ती का शासनादेश की प्रमाणित छायाप्रति, चयन समिति के गठन का आदेश, समिति में शामिल अधिकारियों के नाम और भर्ती विज्ञापन समाचार पत्र सहित मांगा। इस पर विभागीय अफसरों ने मांगे गए कागजात देने की जगह से टरकाना आरंभ कर दिया। इसके बाद भी उसने साहस नहीं छोड़ा और न्याय पाने के लिए राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
राज्य सूचना आयुक्त चंद्रकांत पांडेय ने प्रकरण की सुनवाई की। इस दौरान वादी उपस्थित हुआ, लेकिन प्रतिवादी की ओर से कोई भी हाजिर नहीं हुआ। इस पर राज्य सूचना आयुक्त ने बीएसए के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 (1) के तहत 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। साथ ही अगली सुनवाई चार जुलाई तय कर दी है। उधर, प्रभारी बीएसए राजकुमार पुरोहित का कहना है कि बीएसए मनोज कुमार वर्मा जिले से बाहर हैं, जिससे दो दिन का प्रभार उन्हें सौपा गया है। राज्य सूचना आयुक्त द्वारा अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी नहीं है।