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सपा बसपाउगठ बंधन को गुटबाजी ले डूबी

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सपा-बसपा गठबंधन को गुटबाजी ले डूबी
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ललितपुर। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन की करारी हार हुई है। राजनीति के जानकारों की मानें तो पार्टी कार्यकर्ता गठबंधन को हजम नहीं कर पाए और रही-सही कसर गुटबाजी ने पूरी कर दी। इसी का नतीजा था कि गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा।
ललितपुर जिले में दलितों की खासी संख्या है। यह लोग गरीब और अशिक्षित हैं। अधिकांश गांवों में अभी भी पुरानी व्यवस्था लागू है। समाजवादी पार्टी के शासन काल में यह असहज रहते रहे हैं। लेकिन, अबकी बार गठबंधन हो जाने के कारण उन्हें समझ में नहीं आ रह था कि क्या करें। इसलिए उन्होंने खामोशी ओढ़ ली थी, यदि कोई पूछता भी तो हां- हूं में जवाब देकर बात को टाल देते थे। समाजवादी पार्टी ने इसे महसूस किया था, इसलिए बसपा और सपा के संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलनों में इस बात पर खासा जोर दिया जाता रहा है कि दलित और यादव अब एक हैं। लेकिन, लोकसभा चुनाव परिणामों से ऐसा लग रहा है कि दलितों ने गठबंधन को स्वीकार नहीं किया।
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यदि पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो ललितपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी को 84320 और बहुजन समाज पार्टी को 42961 वोट मिल थे। यदि दोनों मतों को मिला दिया जाए तो 127281 वोट होते हैं। जबकि, अबकी बार गठबंधन प्रत्याशी को कुल 99614 वोट मिले। इसी तरह महरौनी विधानसभा क्षेत्र में पिछले लोकसभा चुनाव में सपा को 82179 और बसपा को 57767 वोट मिले थे। यदि दोनों को जोड़ दिया जाए तो 139946 वोट होते हैं। जबकि, अबकी बार सपा- बसपा गठबंधन प्रत्याशी को 105920 वोट मिले। इससे साफ जाहिर है कि गठबंधन मतदाताओं को लुभा नहीं पाया।
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