उमा भारती फिर उतर सकती हैं चुनाव में !
ललितपुर। लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की चारों सीटों पर जातीय संतुलन का समीकरण साधा जाएगा। ऐसे में संभावना है कि केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती एक बार फिर जनता के बीच वोट मांगने आएंगी। बुंदेलखंड की चार सीटों पर ब्राह्मण, ठाकुर, पिछड़ा और दलित प्रत्याशी किस्मत आजमाएंगे।
बुंदेलखंड में अभी तक झांसी- ललितपुर से केंद्रीय मंत्री उमा भारती, बांदा- चित्रकूट से भैरों प्रसाद मिश्रा, हमीरपुर- महोबा से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल और जालौन- गरौठा से भानु प्रताप वर्मा सांसद हैं। केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। पार्टी नेतृत्व उनका विकल्प तलाश रहा है। दरअसल, नेतृत्व चाहता है कि क्षेत्र में टिकट वितरण ऐसा किया जाए कि जातीय संतुलन बना रहे।
सूत्रों के अनुसार बांदा से सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा की संसद में उपस्थिति बहुत अच्छी रही है। जनहित के मुद्दे उन्होंने लगातार उठाए हैं और वह जनता के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। चूंकि, पार्टी को सांसद प्रत्याशी के रूप में एक ब्राह्मण चेहरे की जरूरत है, इसलिए भैंरों प्रसाद मिश्रा का टिकट करीब-करीब पक्का है। पार्टी दूसरा चेहरा ठाकुर उम्मीदवार को लड़ाएगी। हमीरपुर सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल हैं और हाल ही में उन्होंने बुंदेलखंड की मांग संसद में उठाकर खुद को सुर्खियों में लाए थे। हमीरपुर का जातीय गणित इस तरह का है कि वहां पर अधिकांश लोधी अथवा ठाकुर बिरादरी से ही सांसद रहे हैं। जनता के बीच लगातार उनकी सक्रियता भी ऐसी है कि उनके खिलाफ नाराजी बहुत कम है।
इसी तरह जालौन- गरौठा सीट से सांसद भानुप्रताप वर्मा की लोकप्रियता है और उनकी गिनती मिलनसार नेताओं में होती है। ऐसे में इन तीनों सांसदों के टिकट कटने की संभावना बहुत कम है।
पार्टी का पिछड़ा वर्ग में सर्वाधिक वोट बैंक लोधी और कुशवाहा समाज का है। रामरतन कुशवाहा ललितपुर से विधायक हैं और झांसी के हरगोविंद कुशवाहा उप्र बौद्ध शोध संस्थान से जुड़े हैं। हमीरपुर सीट लोधी बाहुल्य है, जबकि बांदा में कुर्मी वोट अधिक है। चूंकि, कुर्मी बिरादरी से चित्रकूट में विधायक भी हैं। गरौठा से जवाहर लाल राजपूत विधायक हैं। संभावना जताई जा रही है कि झांसी सांसद की सीट लोधी उम्मीदवार के खाते में जा सकती है। झांसी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है, इसलिए पार्टी चाहती है कि झांसी से कोई बड़ा चेहरा उतारा जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मंच से केंद्रीय मंत्री उमा भारती की तारीफ कर चुकें हैं और पार्टी में इस कद का कोई दूसरा नेता नहीं होने की स्थिति में उमा भारती को फिर से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। सूत्रों के अनुसार पार्टी यदि निर्णय लेगी तो केंद्रीय मंत्री इंकार भी नहीं कर पाएंगी, दूसरे लोधी वोट बैंक भाजपा को जीत दिलाने में निर्णायक साबित होगा, इसलिए भी अंतत: उमा भारती के नाम पर सर्वसम्मति बन जाएगी।
झेलनी पड़ सकती जनता की नाराजी
केंद्रीय मंत्री ने इस बात को स्वयं महसूस किया है कि जनता से कम मुलाकात हुई है। लेकिन, इसके पीछे की वजह यह है कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते उनके ऊपर सांसद के अलावा भी जिम्मेदारियां हैं। इस वजह से वह क्षेत्रवासियों को कम समय दे सकी। ऐसे में चुनाव में उन्हें जनता की नाराजी भी झेलनी पड़ सकती है। लेकिन बड़ी नेता हैं, इसलिए उनके लिए हार- जीत के कोई मायने नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी लोकसभा चुनाव हार गए थे, फिर भी उन्होंने बतौर वित्त मंत्री पूरी जिम्मेदारी संभाली।
पूरे प्रदेश में संदेश जाएगा
लोधी वोट बैंक अकेले हमीरपुर या झांसी संसदीय क्षेत्र में ही निर्णायक नहीं है, बल्कि प्रदेश की कई संसदीय सीटें ऐसी हैं, जहां लोधी वोट हार जीत का फैसला करता है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती पार्टी में बड़ा कद और चेहरा है। पार्टी केंद्रीय मंत्री को चुनाव लड़ाकर संदेश भी देना चाहेगी, ताकि पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल हों।