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टपरियन बस्ती में नहीं झांकने जाते नगर पालिका कर्मी

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टपरियन बस्ती के दर्द से बेपरवाह है प्रशासन
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गलियों में भरा बारिश का पानी, कीचड़ से पटी पड़ीं सड़कें
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। वार्ड नंबर 23 अंतर्गत आने वाली टपरियन बस्ती में घोर उपेक्षा हो रही है। यहां की गलियों में बारिश का पानी भरा है तो कई जगहों पर नाली के अभाव में सड़क कीचड़ से पट गई हैं। इतना ही नहीं, चार में से एक हैंडपंप ही समूची बस्ती की प्यास बुझा रहा है। इसके चलते स्थानीय लोगों में असंतोष पनप रहा है।
शहर के एक छोर पर बसी टपरियन बस्ती रावतयाना प्रथम वार्ड में आती है। इसी वर्ष नगर की सीमा विस्तार के बाद इसे नगर पालिका में सूचीबद्ध किया गया है। लेकिन इस बस्ती को आज भी विकास की गंगा बहने का इंतजार है। स्वच्छ भारत मिशन चालू होने के बाद भी सफाई कर्मी यहां सफाई के लिए नहीं पहुंचते हैं। यहां ग्राम पंचायत द्वारा पूर्व में डाले गए रास्ते आज भी हैं लेकिन नालियां नजर नहीं आती हैं। बीते दिनों बारिश हुई तो पानी गलियों की सड़कों पर जमा हो गया। कई गलियों में कीचड़ फैला है। इससे लोगों को एक गली से दूसरी गली में जाने की समस्या उत्पन्न हो गई है। स्ट्रीट लाइट के पोलों पर खराब लाइटें लगी हुई हैं। इससे शाम होते ही बस्ती में अंधेरा पसर जाता है। वहीं, पेयजल की भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां चार में से एक ही हैंडपंप काम कर रहा है। इससे स्थानीय लोगों की समस्याएं कम नहीं हो पा रही हैं।
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बस्ती रोशनी का इंतजाम नहीं
बस्ती में रोशनी की समस्या है। सभासद ने स्ट्रीट लाइट का इंतजाम किया था, लेकिन लाइटें ज्यादा दिन नहीं चल पाई। इससे बस्ती में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। एक सोलर लाइट लगी हुई जो बस्ती से दूर है। इसके चलते बस्ती में रोशनी की बहुत आवश्यकता महसूस की जा रही है। आसपास खेत लगे होने के कारण जहरीले कीड़ों के विचरण का अंदेशा बना रहता है।
शंकर

नहीं बनवाए जा रहे व्यक्तिगत शौचालय
बस्ती में सहरिया आदिवासी, कुशवाहा बड़ी संख्या में रहते हैं। यहां के लोगों ने सौ से डेढ़ सौ रुपये आनलाइन आवेदन पर खर्च किए, लेकिन किसी को अनुदान की राशि प्राप्त नहीं हो सकी है। इस मामले में नगर पालिका परिषद के कर्मचारी मनमानी बरत रहे हैं। जिससे खुले में शौच की समस्या बस्ती में बनी हुई है।
महेंद्र

पेयजल पर किसी नहीं ध्यान
बस्ती में 60-70 परिवार रहते हैं। इनकी प्यास बुझाने के लिए चार हैंडपंप लगाए गए हैं। इनमें से तीन खराब चल रहे हैं। एक हैंडपंप को खराब हुए दो माह से ज्यादा का समय हो गया है। यदि चालू हैंडपंप भी खराब हो गया तो बस्ती के लोगों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करना कठिन हो जाएगा।
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जानकी

घर में घुस जाता बारिश का पानी
बस्ती की गलियों में जल जमाव की समस्या बनी हुई है। जब बारिश होती है तो गली में जमा हुआ पानी घर में भी घुस जाता है। इसके चलते कई बार रात जागकर गुजारनी पड़ती है। इसके अलावा मौसमी बीमारियों के फैलने की संभावना बनी हुई है। यहां न तो स्वास्थ्य और न ही नगर पालिका के कर्मचारी आ रहे हैं। इससे समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
जाता
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