गोविंद सागर बांध की सुरक्षा के साथ हो रहा खिलवाड़
ललितपुर। शहर के एक छोर पर बने गोविंद सागर बांध की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बांध को करीब देखने के लिए लोहे के पोल सुरक्षा की दृष्टि से गेट के पास लगाए गए हैं, लेकिन जिन खंभों पर ये टिके हैं, उनमें से कई सीमेंटेड पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, बांध की क्षतिग्रस्त चहारदीवारी की मरम्मत नहीं हो सकी है। इससे सैलानियों की सुरक्षा का खतरा बना हुआ है। इस पूरे मामले में विभागीय अफसर मौन बन हुए हैं।
गोविंद सागर बांध का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। बांध का उद्घाटन प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंथ ने किया था। उन्हीं के नाम पर गोविंद सागर बांध रखा गया है। इसमें स्वचालित साइफन प्रणाली स्थापित है। जब बांध में तेजी से अतिरिक्त पानी एकत्रित होने लगता है तो साइफन स्वत: हवा के दवाब में चल जाते हैं। इसके अलावा बांध में अठारह फाटक लगे हुए हैं। बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के लिए दायी व बाई नहर निकाली गई है। बांध का पूर्ण जल स्तर 1194 फीट रखा गया है। पिछले कई सालों से बांध पूर्ण क्षमता के साथ भर नहीं पाया है। गत वर्ष 1188 फीट ही बांध भर पाया था। इस बार बांध का जल स्तर 1191.5 हो गया है। यह लोगों में कौतुहल का विषय बना हुआ है। बांध पर बडी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। कई नौजवान बांध की पट्टी, सलूस व गेट के आसपास खड़े होकर पानी के साथ सेल्फी ले रहे हैं। इसके बाद भी सैलानियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सलूस एक ओर लोहे के पाइप इधर-उधर लटक रहे हैं। यहां का गेट भी टेढा-मेढ़ा है। जिससे सलूस तक लोग आसानी से पहुंच जाते हैं। बांध के फाटक के पास भी कई सीमेंट के खंभे क्षतिग्रस्त हैं। दोनों की जगहों पर नई पीढ़ी मोबाइल से सेल्फी ले रही है। यदि यहां थोड़ी चूक हो गई तो किसी भी जान जा सकती है। यही नहीं, बांध की क्षतिग्रस्त चहारदीवारी की भी मरम्मत नहीं की जा रही है जबकि बांध का पानी चहारदीवारी के आसपास पहुंच गया है। यहां लोग बांध के अंदर उतर रहे हैं। कोई मत्स्य आखेट कर रहा है तो कोई गाड़ी की धुलाई में जुुटा है। सामान्यता बांध पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहती है। इन्हें रोकने के लिए बांध के दोनों किनारों पर लोहे के गेट लगाए गए थे लेकिन वह क्षतिग्रस्त पड़े हैं। जिससे हल्के व भारी वाहन फर्राटा भरकर निकल रहे हैं। ऐसे में बांध पर सैर सपाटा करने पहुंच रहे सैलानियों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। हालांकि, बांध की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी बनी हुई है लेकिन तैनात पुलिस बल भी इस मामले में उदासीन बना हुआ है।
सुरक्षा का जिम्मा पुलिस के पास
बांध की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की है। बांध पर वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस को सूचना दी गई है। बांध की चहारदीवारी व गेट की पूर्व में मरम्मत कराई जा चुकी है लेकिन असामाजिक तत्व इन्हें पुन: नुकसान पहुंचाते हैं। इससे यह स्थिति बन रही है।
विकास दीप, अवर अभियंता
राजघाट निर्माण खंड