खर्च हुए दाम, नहीं हुआ सही काम
ललितपुर।
शहर की सुंदरता पर विभागों की उदासीनता भारी पड़ रही है, जिन चौराहों का डूडा व पालिका ने कायाकल्प कराया था, उनमें वर्णी चौराहे को छोड़कर किसी की भी सुंदरता कायम नहीं रह सकी है। चौराहे पर स्थापित किए गए फव्वारे देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अन्य व्यवस्थाओं का भी हालबेहाल है।
किसी शहर के विकास को चौराहों की सुंदरता से आंका जाता है, इसे ध्यान में रखकर चौराहों का कायाकल्प कराया जाता है। इसमें फव्वारों की स्थापना, लाइटिंग आदि की व्यवस्था की जाती है। वर्ष 2000 में लायंस क्लब सावरकर चौक के सुंदरीकरण कराने की पहल की गई। इस दौरान इस चौराहे पर वीर सावरकर की प्रतिमा की स्थापना के साथ फव्वारा भी लगवाया गया था। वर्ष 2005 में तत्कालीन डीएम संयुक्त समद्दार नगर पालिका की प्रशासक रहीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कृत्रिम नारियल के पेड़ विभिन्न चौराहों पर लगवाए थे, जिसकी लाइट रात्रि में सभी को आकर्षित करती थी। तत्कालीन जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने चौराहों की सुंदरता में दिलचस्पी ली। उन्होंने जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को कार्यदायी संस्था नामित करके राजस्थान के लाल पत्थरों से फव्वारे का निर्माण कराया। इनमें एक तुवन मंदिर चौराहे पर तो दूसरा कचहरी चौराहे बनवाया गया। वहीं, नगर पालिका परिषद ने वर्णी चौराहे पर फव्वारा बनवाने की जिम्मेदारी ली। वर्तमान में तुवन मंदिर, कचहरी चौराहे व सावरकर चौक के फव्वारे काम नहीं कर रहे हैं। परमानंद मूर्तिस्थल के सामने फव्वारे की तो चहारदीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है, इसके अलावा मोटरें भी खराब पड़ी हैं। जिला कारागार के सामने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा लगाकर इतिश्री कर ली गई है। इस प्रतिमा के चारों ओर होर्डिंग्स के फ्रेम लगे हुए हैं। जब सभी ओर लगे फ्रेम में फ्लेक्स लग जाते हैं तो प्रतिमा भी नजर नहीं आती है। जेल चौराहे पर बने पार्कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। पानी की बड़ी टंकी के पास बेरतबीब टैक्सी खड़ी रहती हैं, जिससे यहां भीड़भाड़ बनी रहती है। पुराना सदरकांटा चौराहा अतिक्रमण की चपेट में है। कैलगुवां चौराहे पर किसी प्रकार के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है। इस तरह शहर आज भी कस्बे की माफिक नजर आता है।
शहर की नहीं बदल सकी सूरत
आजादी के बाद से शहर के विकास पर लाखों रुपये व्यय किए जा चुके हैं। लेकिन शहर की सूरत जस की तस है। जब बाहर रहने वाले लोग अपनी जन्मस्थली पर आते हैं तो उन्हें पुराना ललितपुर ही दिखाई देता है।
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कैप्सन-दीपक सिंघई
नपाध्यक्ष से उम्मीदें
शहर के चौराहे सौंदर्यीकरण पर ध्यान देने की जरूरत है। जो पूर्व में फव्वारे बनाए गए, उन्हें रखरखाव पर गौर नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि फव्वारे शोपीस बने हुए हैं। हाल ही में रजनी साहू पालिका में अध्यक्ष पद पर जीतकर पहुंची हैं। उनसे शहर के विकास की बड़ी उम्मीदें हैं।
दीपक सिंघई
रेडीमेड कपड़ा विक्रेता
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कैप्सन- नंदू साहू
कर्मचारियों की जवाबदेेही तय की जाए
चौराहे पर फव्वारे तो बना दिए गए लेकिन उनके रखरखाव की जिम्मेदारी उठाने के लिए कोई तैयार नहीं है। नगर पालिका अध्यक्ष को चाहिए कि वह कर्मचारियों को रखरखाव के लिए जिम्मेदार बनाया जाए। उन्होंने प्रत्येक फव्वारे पर एक कर्मचारी तैनात करने का सुझाव दिया है।
नंदू साहू
स्थानीय नागरिक
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कैप्सन-संजीव कुमार
टीकमगढ़ की तर्ज पर चौराहे हों विकसित
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में चौराहे देखने लायक हैं। जब यहां चौराहों को देखते हैं तो मन प्रसन्नचित्त हो जाता है। वहीं, जब शहर में वापस लौटकर चौराहों की हालत देखते हैं तो मन में पीड़ा होती है। शहर में विभिन्न्न चौराहों को विकसित करने की आवश्यकता है।
संजीव कुमार
दवा विक्रेता
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कैप्सन- जगदीश कंचन
चौराहे की सुंदरता से शहर लगता अच्छा
चौराहों की सुंदरता से शहर के विकास में चार चांद लग जाते हैं। यहां चौराहे के विकास पर काम तो किया गया, लेकिन उन्हें पलटकर कभी देखा नहीं गया। नतीजा यह हुआ कि शहर के अधिकांश चौराहे बदरंग नजर आते हैं। नगर पालिका चौराहों को सुंदर बनाने के लिए लाइटिंव्ग, फूल के पौधों का रोपण कराए।
जगदीश कंचन
फूल विक्रेता
चौराहों के विकास का खाका तैयार
शहर के चौराहों का सौंदर्यीकरण जल्द ही कराया जाएगा। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। प्रत्येक चौराहे पर मूत्रालय की स्थापना भी की जाएगी।
रजनी साहू, अध्यक्ष
नगर पालिका परिषद ललितपुर