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विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं चेता जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग

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बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन बेखबर
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ललितपुर।
हरियाणा के गुरुग्राम में संचालित रेयान इंटर नेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न की हत्या हुए पांच दिन से अधिक समय बीत गया है। जनपद के अधिकारियों की उदासीनता देखिए कि जहां इस घटना की वजह से केवल हरियाणा नहीं बल्कि देश भर में निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कोलेकर जागरूकता का माहौल है, वहीं जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अभी कोई पहल नहीं की गई है।
बीते शुक्रवार को हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय बालक प्रद्युम्न की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश में निजी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं और इसी के तहत केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री व अन्य उच्चाधिकारियों की बैठक तक हो चुकी है। इस सबके बावजूद भी ललितपुर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा है। अब तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक के द्वारा विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पहल शुरू नहीं की गई है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी तो अभी नहीं चेते हैं, लेकिन अमर उजाला की टीम ने जिला मुख्यालय पर संचालित निजी हिंदी व अंग्रेजी दोनों ही माध्यमों के लगभग एक दर्जन विद्यालयों में जाकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसमें से आधे से अधिक विद्यालयों के परिसर व कक्षों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए हैं। साथ ही विद्यालय में प्रवेश करने वाले बाहरी व्यक्ति की पहचान दर्ज करने के लिए नेंटरी रजिस्टर की व्यवस्था भी नहीं है, जो बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ है। इसके अलावा किसी भी विद्यालय के द्वारा संस्था में तैनात शिक्षकों व अन्य स्टाफ कर्मियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं है। इन सबके अलावा यदि स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो इसमें सबसे अहम पहलू होता है घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित ले जाने वाले वाहन चालक की। जनपद में संचालित कुछ ही विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने खुद के स्कूल वाहन लगाए हुए हैं, लेकिन इन विद्यालयों में भी मात्र एक या अधिकतम दो ही स्कूली वेन लगी हुईं हैं। अधिकांश विद्यालयों के बच्चे ऑटो से स्कूल आते-जाते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के अभिभावक व संबंधित विद्यालय के पास ऑटो चालकों की पहचान और उनका सत्यापन नहीं होता है। स्कूल वालों को यह भी पता नहीं होता है कि जो ऑटो चालक बच्चे को स्कूल से लेकर जा रहा है वह वास्तव में चालक है उसके भेष में कोई अपराधी किसी घटना को अंजाम देने तो नहीं आया है। वर्तमान में किसी भी विद्यालय में ऑटो चालक की पहचान के संबंध में कोई इंतजाम नहीं है। इसलिए ऑटो चालकों की पुलिस सत्यापन और स्कूलों में पहचान के लिए कोई कदम उठाने चाहिए।
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केवल कागजी घोड़ा दौड़ाने से नहीं बनेगा काम
हालांकि वर्तमान में जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के द्वारा विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई पहल शुरु नहीं की गई है, लेकिन जल्द ही प्रशासन व शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खाना पूर्ति करने के लिए सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर कागजी घोड़ा दौड़ाने लगेंगे। लेकिन, केवल कागजी घोड़ा दौड़ाने से काम नहीं बनेगा, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से कार्यालय से बाहर निकलकर विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा और इन नियमों का पालन कराने के लिए सख्ती से पेश आना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन पूर्व से ही जारी है, लेकिन इनका अनुुपाल नहीं हो रहा है। माध्यमिक विद्यालयों में जुलाई माह के अंत तक सीसीटीवी कैमरे लगने थे, लेकिन अभी तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे बहुुत से दिशा-निर्देश है जो मात्र कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। इसमें पुलिस प्रशासन और यातायात पुलिस को भी अपनी भागीदारी निभाने के लिए आगे आना होगा। जनपद में बड़ी व छोटी समस्त ऑटो मिलाकर चार-पांच हजार ऑटो संचालित हो रही हैं, इनमें से किसी भी चालक का पुलिस सत्यापन नहीं है और न हीं इनकी कोई पहचान है।
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फोटो- 12
अभिभावकों को भी आगे आना होगा
अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को गंभीरता दिखानी होगी। प्रशासन व अधिकारी निर्देश जारी कर सब भूल जाते हैं। यदि अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जारी किए गए निर्देशों का अनुुपालन कराना है तो अभिभावकों को आगे आना होगा और पहले खुद जागरुक होना होगा।
-भरत श्रीवास्तव
अभिभावक।
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फोटो- 13
अधिकारी नहीं करा पा रहे सुरक्षा नियमों का पालन
विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा, ऑटो चालकों का सत्यापन व पहचान समेत अन्य नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में ही जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इन नियमों का विद्यालयों में अनुपालन नहीं किया जाता है। इसकी मुख्य वजह जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता है, यदि विद्यालयों पर सख्ती की जाएगी तो अपने आप ही नियमों का पालन होता दिखाई देने लगेगा।
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-अजय तोमर
अधिवक्ता।
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इनका कहना है
इस संबंध में समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों के निर्देश जारी किए जा रहे हैं, ताकि वह अपने क्षेत्र में संचालित समस्त विद्यालयों को निर्देश जारी करके बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें।
-अंबरीष कुमार
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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