जिला पंचायत ने की कार्रवाई, डीएम ने एडीएम से जांचकर मांगी प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला पंचायत के अधीन 1901 का निर्मित डाक बंगला कस्बा बिरधा में मौजूद था। जिला पंचायत ने इस 124 साल पुरानी इमारत को बिना किसी तकनीकी कमेटी का गठन करते हुए ध्वस्त कर दिया। हालांकि इस प्रकरण ने राजनैतिक तूल पकड़ लिया है। तो वहीं जिलाधिकारी ने प्रकरण में जांचकर रिपोर्ट एडीएम से मांगी है।
जनपद झांसी से अलग होकर ललितपुर को 1974 में नया जनपद घोषित किया गया। इसके बाद यहां पर जिला पंचायत का गठन हुआ। इसके साथ ही झांसी जिला पंचायत के अधीन संपत्ति को जिले में शामिल किया गया, जिसमें सात अंग्रेजों के समय निर्मित करीब 100 साल पुराने डाक बंगले थे। इनमें बिरधा डाक बंगला भी शामिल था। यहां पर जिला पंचायत की करीब चार एकड़ भूमि है। इस डाक बंगले को दीपावली के ठीक पहले जिला पंचायत ने जमींदोज करा दिया, जिससे विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह मामला तूल पकड़ गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने तो इसे पुराने इतिहास नष्ट करने की साजिश करार दिया है। तो वहीं, जिला पंचायत यहां पर खेल मैदान व अन्य निर्माण व जर्जर इमारत होने के कारण इसे ध्वस्त करने का कारण बता रहे हैं। पेंच यहां पर फंस गया है कि इस इमारत ध्वस्त करने के पूर्व इसकी स्थिति को जांचने के लिए कोई भी तकनीकी कमेटी का गठन किया गया था या नहीं। जिलाधिकारी अमनदीप डुली ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच करते हुए एडीएम से इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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ये हैं पुरानी संपत्ति
डाक बंगला - वर्तमान की स्थिति
बिरधा डाक बंगला - ध्वस्त
बंट डाक बंगला - ध्वस्त व अवैध कब्जा
बांसी डाक बंगला- ध्वस्त
उदयपुरा डाक बंगला- बजाज पवार प्लांट ने किया अधिकृत
राजघाट डाक बंगला - बेतवा रिवर बोर्ड ने किया अधिग्रहण
धौरी सागर डाक बंगला- वन विभाग के कब्जे में
मड़ावरा डाक बंगला - वन विभाग के कब्जे में
जर्जर इमारत का जनहित में ध्वस्त करना था आवश्यक
जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश नारायण निरंजन ने कहा कि जिला पंचायत की संपति थी, यह पुरातत्व विभाग में दर्ज डाक बंगला नहीं था। इस भूमि पर गोवंश आश्रयस्थल व खेल मैदान का प्रस्ताव जिला पंचायत बोर्ड में जनता की मांग पर रखा गया था। डाक बंगला जर्जर होने के कारण कभी कोई अप्रिय घटना घट सकती थी। इसलिए इसे गिराया जाना उचित था। विगत चार वर्ष पूर्व बरसात में इसकी दीवार गिरने से कुछ गाय घायल हुई थीं। ऐसे में वहां पर कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए यह इमारत जनहित में ध्वस्त करना आवश्यक थी। वर्तमान में इस खंडर में असामाजिक अनैतिक कार्यों को अंजाम दे रहे थे।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विरासत समाप्त करना बताई साजिश
पूर्व कंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि बिरधा में सैकड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने की खबर बेहद चिंताजनक है। यह सिर्फ़ एक दीवार या ढांचा नहीं था, यह हमारी विरासत, हमारी पहचान और हमारे इतिहास का जीवंत प्रमाण था। विकास के नाम पर इतिहास को मिटाया जा रहा है, साथ ही प्रशासन को भी उन्होंने पुरानी संरचनाएं सांस्कृति संपदा को संरक्षित करने के लिए सजग होना है। उन्होंने पूरे प्रकरण विस्तृत जांच कर विरासत नष्ट करने की साजिश में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बिरधा स्थित डाक बंगले को ध्वस्तीकरण की जांचकर विस्तृत रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव से मांगी गई है।
अमनदीप डुली जिलाधिकारी