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शहर की सुंदरता लील गया अतिक्रमण, वनवे भी प्रभावित

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शहर की सुंदरता लील गया अतिक्रमण, वनवे भी प्रभावित
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नागरिक चाहते अतिक्रमण हटे, प्रशासन गंभीर नहीं
अतिक्रमण हटाओ अभियान तीसरे बार हुआ स्थगित
अमर उजाला ब्यूूरो
ललितपुर। अतिक्रमण ने शहर की सुंदरता को बुरी तरह निगल लिया है। इससे मुख्य सड़कों के साथ वनवे भी अछूता नहीं रहा है। इसका नतीजा यह है कि प्रमुख सड़कों पर वाहन रेंगकर निकलते हैं तो राहगीरों को पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी प्रशासन गंभीर नहीं है।
ललितपुर को जिला बने हुए चार दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसका विकास उतनी तेजी से नहीं हो सका है। इसमें एक वजह अतिक्रमण रही है। शहर को ही ले लीजिए। प्रमुख सड़कें, फुटपाथ, बाजार, पार्क, स्मारक, पार्किंग स्थल, प्राचीन जल स्रोत, प्याऊ, बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, तांगा स्टैंड, प्रसाधन केंद्र, नालियां अतिक्रमण की चपेट में हैं। इन जगहों पर कच्चा, पक्का अतिक्रमण पसरा है। यही नहीं, नगर पालिका को जो सीमा विस्तार में ग्राम पंचायतों से भूमि मिल रही है, उसमें भी अतिक्रमण देखा जा रहा है। जब भी नगर पालिका कोई नया कार्य कराती है तो उसके सामने पहली चुनौती अतिक्रमण हटाने की होती है। अक्सर देखा जाता है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान राजनीतिक दबाव सामने आ जाता है, ऐसी स्थिति में काम ठंडे बस्ते में चला जाता है या फिर उसके लिए नए स्थान की तलाश प्रारंभ हो जाती है। कई काम तो भूमि की अनुलब्धता के चलते प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं। अतिक्रमण की समस्या से अकेले नगर पालिका ही परेशान नहीं है बल्कि यातायात पुलिस को परिवहन का सुचारू आवागमन बनाना मुश्किल हो रहा है। बीते माहों में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने शहर के मुख्य मार्ग पर वाहनों का दवाब करने के मकसद से वनवे सावरकरचौक से तुवन चौराहा बाया तालाबपुरा किया तो नागरिकों ने कुछ महीनों तक राहत महसूस की लेकिन अब वनवे नागरिकों के लिए मुसीबत बन गया है। इस व्यवस्था में भी अतिक्रमण ने खलल डाल दिया है। तालाबपुरा से लेकर साईं मंदिर तक सड़क किनारे दोनों ओर जगह-जगह चार व दुपहिया वाहन पार्क रहते हैं। इससे यातायात व्यवस्था निरंतर चरमरा रही है। इसके बाद भी जब अतिक्रमण हटाने की बारी आती है तो जिम्मेदार अधिकारी एक कदम आगे चलने के बाद अपने पैर खींच लेते हैं। जिस वजह से अतिक्रमण हट नहीं पा रहा है। जिससे जागरुक नागरिकों में असंतोष है।
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घंटाघर स्थल बना हाट बाजार
घंटाघर ऐसा स्थल है जहां एक ओर नगर पालिका कार्यालय है तो दूसरी ओर सीओ आफिस है। जहां सीओ परिवहन व्यवस्था क लिए सीधे जिम्मेवार हैं तो पालिका नगर के सौंदर्यीकरण के लिए। इसके बाद भी घंटाघर प्रांगण हॉट बाजार की शक्ल ले चुका है। त्योहार के मौके पर बीच सड़क पर हाथ ठेला कतार में खड़े हो जाते हैं, जिन पर त्योहार का सामान बेचा जाता है। इन दिनों यहां दुर्गा प्रतिमाएं बिक्री के लिए रखी गई हैं।
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अतिक्रमण बन रहा दुर्घटना का कारण
अतिक्रमण से आवागमन में असुविधा होती है और यही दुर्घटना का कारण बनता है। जब भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए, इसमें पूरी ईमानदारी बरतने की जरूरत है। वरना, अतिक्रमण की समस्या हमेशा बनी रहेगी।
हाजी कादिर खान
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फुटपाथियों का पहले विस्थापन हो
अतिक्रमण हटाने से पहले फुटपाथियों को विस्थापित करने की प्रक्रिया अपनाई जाए। उसके उपरांत निष्पक्ष तरीके से कच्चा, पक्का अतिक्रमण हटाएं। अतिक्रमण हटाने की आड़ में बेेरोजगारी न फैले, इसे सुनिश्चित किया जाए।
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रामकोटि तांत्रिक
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वेंडिंग व नो वेंडिंग जोन चिह्नित
नगर पालिका परिषद ने वेंडिंग व नो वेंडिंग जोन चिह्नित कर लिए गए हैं। वहीं, फुटपाथी दुकानदारों के पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बता दें कि जिला प्रशासन तीन बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए तिथियां तय कर चुका है लेकिन हर बार अतिक्रमण हटाने का अभियान टाय-टाय फिस्स हो चुका है।
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दशहरा के बाद चलेगा अभियान
त्योहारों के मद्देनजर एसडीएम सदर के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया है। अब दशहरा के उपरांत दोबारा तारीख तय की जाएगी।
अवनींद्र कुमार
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद
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