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ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को जालियां भी नहीं, प्लंथ भी टूटे

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ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को जालियां ही नहीं, प्लंथ भी टूटे
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प्रशासन की अनदेखी के कारण बड़ा हादसा की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मुख्य सड़कों और मुहल्लों में बीच सड़कों पर खुले में रखे ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा को जालियां तो नहीं लग सकी हैं, अब उनके प्लंथ (प्लेटफार्म) भी टूटने लगे हैं, जिससे ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के साथ ही आम लोगों को भी खतरा बना हुआ है।
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शहर में उपभोक्ताओं को सुचारु बिजली आपूर्ति देने के लिए विद्युत विभाग द्वारा विभिन्न मुहल्लों, मुख्य सड़कों और गलियों में करीब तीन सौ से अधिक ट्रांसफार्मर स्थापित हैं। उनके माध्यम से उपभोक्ताओं के घरों और प्रतिष्ठानों को बिजली दी जाती है। विभाग द्वारा इन ट्रांसफार्मरों तक 11 हजार केवी के तारों से हाइवोल्टेज करंट पहुंचता है, जो ट्रांसफार्मर से एलटी लाइन के माध्यम से उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचता है। ट्रांसफार्मर स्थापित करने के दौरान नियमत: विभाग को इन ट्रांसफार्मरों के रखरखाव के साथ ही इनसे आम लोगों की सुरक्षा के भी पर्याप्त प्रबंध किए जाने होते हैं। इसके अंतर्गत विभाग द्वारा या ठेकेदार द्वारा जमीन पर प्लंथ बनाकर इन ट्रांसफार्मरों को स्थापित किया जाता है या फिर खंभों पर ही ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाते हैं। इनकी ऊंचाई पर्याप्त होनी चाहिए। जबकि जमीन पर प्लंथ बनाकर स्थापित किए गए ट्रांसफार्मरों से सुरक्षा के लिए जालियां लगाई जाती हैं। लेकिन शहर में जमीन पर प्लंथ बनाकर रखे गए सत्तर फीसदी ट्रांसफार्मर के चारों ओर जालियां नहीं लगी हैं। यहां तक कि कई ट्रांसफार्मर को बीच बाजार में भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही स्थापित किए गए हैं, जिनसे सभी लोग इन ट्रांसफार्मर की पहुंच में रहते हैं और हर समय इन क्षेत्रों में हादसों का भय बना रहता है। मुख्य घंटाघर के पास प्रधान डाकघर के पास खुले में रखे एक साथ दो ट्रांसफार्मर स्थापित हैं, जिनके पास दिन और छोटे व्यापारी अपने-अपने विभिन्न व्यवसाय करते हैं। यहां तक कि कई व्यापारी अपना सामान भी इन ट्रांसफार्मर के प्लंथ पर ही रख देते हैं। जिससे यहां हर समय लोग जान जोखिम में डालते दिखाई देते हैं। वहीं घंटाघर से सावरकर चौक के मध्य महावीर प्याऊ से सटकर लगाए गए ट्रांसफार्मर के चारों ओर भी कई व्यापारी अपना फुटकर व्यवसाय जमाए हुए हैं और इसके प्लंथ को भी अपना स्टैंड बनाकर उपयोग करते दिखाई देते हैं। इसी प्रकार अटा मंदिर के सामने स्थापित ट्रांसफार्मर के पास भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई देता है, जब यहां सुबह से व्यापारी अपना काम धंधा जमा बैठ जाते हैं और देर शाम तक यहां लोगों की भीड़ जमा रहती है। इतने व्यस्ततम बीच बाजार में रखे ट्रांसफार्मर के लिए जालियां नहीं लगाई गई हैं, जो कहीं न कहीं बिजली विभाग की उदासीनता भी उजागर करती हैं। इसी प्रकार मुहल्ला आजादपुरा में स्थापित ट्रांसफार्मर के प्लंथ का एक हिस्सा ही टूटने लगा है, जिससे यहां हादसा होने का खतरा बना रहता है। हालांकि विभाग द्वारा इन ट्रांसफार्मरों से सुरक्षा के लिए जालियां लगाने और प्लंथ की मरम्मत आदि के लिए कई बार प्रस्ताव तो तैयार किया गया, लेकिन अब तक इसके लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
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शहर में रखे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत, जालियों और प्लंथ के टूटने का सर्वे कराया जाएगा। जहां भी कमियां होंगी, उन्हें शीघ्र ही दूर कराया जाएगा।
शैलेंद्र कुमार कटियार, अधिशासी अभियंता, विद्युत प्रथम।
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