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सीमा विस्तार की गुजरी साल, फिर भी जमीन नहीं आ पाई हाथ

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साल बीतने के बाद भी सीमा विस्तार को जमीन नहीं आई हाथ
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ललितपुर। एक साल बीतने के बाद भी सीमा विस्तार में ग्राम पंचायतों से प्राप्त हुई जमीन नगर पालिका परिषद अब तक अपने हाथ में नहीं ले पाई है। मौजूदा समय में नगर पालिका की कार्रवाई सीमांकन के ईदगिर्द ही घूम रही है। इसका विपरीत प्रभाव पालिका की प्रस्तावित योजनाओं पर देखा जा रहा है। जमीन के अभाव में योजनाओं को मूर्त रूप नहीं दिया जा पा रहा है।
आधुनिक सुख-सुविधाओं के खातिर ग्रामीण अब शहर में रहना पसंद करने लगे हैं। इस वजह से शहर का तेजी से विस्तार हुआ है। कई साल से शहर की सीमा के विस्तार की मांग की जा रही थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने इसकी आवश्यकता समझते हुए सीमा विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी। इसी सीमा विस्तार पर नगर पालिका परिषद ने चुनाव कराए गए। इसके बाद भी गांव से शहर में आए लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। इससे लोगों में नाराजगी देखी जाने लगी। वहीं, पालिका की कई योजनाएं भूमि के अभाव में ठंडे बस्ते में जाने लगी। पालिका ने प्रशासन का सहयोग लेकर कान्हा पशु आश्रय स्थल ग्राम दैलवारा में खुलवा दिया।
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हाल ही में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए ग्राम दैलवारा में ही जमीन अधिग्रहित की गई है। वर्तमान में कई प्रसाधन केंद्र जमीन की कमी से जूझ रहे हैं। उधर, पालिकाध्यक्ष रजनी साहू ने पालिका को ग्राम पंचायतों से प्राप्त हुई भूमि को अपने हाथ में लेने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है, इसके तहत आउटसोर्सिंग से एक सेवानिवृत्त लेखपाल, दो सेवानिवृत्त कर्मियों को छह माह के लिए नियुक्त किया गया है। इन कर्मियों को भूमि की नापजोख की जिम्मेदारी दी गई। एक साल गुजरने के बाद भी सेवानिवृत्त कर्मी पालिका की मंशा पर खरे नहीं उतर सके हैं। बताया गया है कि आउटसोर्सिंग कर्मियों ने ललितपुर तहसील से संबंधित ग्राम पंचायतों की भूमि का ब्योरा जुटा लिया है। गाटा संख्या के आधार पर भूमि का चिह्नांकन किया जा रहा है। कई जगहों पर पालिका ने अपनी सीमा के पत्थर लगा दिए हैं। भूमि की नापजोख में लोकसभा चुनाव आड़े आ गया। ऐसे में तहसील के लेखपाल और कानूनगो भूमि की नपाई में समय नहीं दे पा रहे हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी डॉ. संजय कुमार मिश्र ने चल रहे कार्यों का मौका मुआयना किया है। उनका कहना है कि भूमि के हस्तांतरण की कार्रवाई लगभग अस्सी प्रतिशत हो चुकी है। बाकी बीस प्रतिशत की कार्रवाई लोकसभा मतगणना के उपरांत पूरी कर ली जाएगी।

जमीन कारोबारियों ने कर लिया खेल
शहर का सीमा विस्तार होने के साथ ही ग्राम पंचायतों ने पालिका के लिए भूमि छोड़ दी है। उधर, नगर पालिका जमीन की नापजोख समय से नहीं करा पाई। इसका लाभ उठाकर कुछ जमीन कारोबारियों ने भूमि पर अतिक्रमण, कब्जा जैसी कार्रवाई शुरू कर दी। इसे जानकर भी नगर पालिका अंजान बनी हुई है।

यहां हुआ सीमा विस्तार
सीमा विस्तार में वार्ड नंबर तेइस रावतयाना प्रथम में ग्राम पंचायत पनारी से सहरिया टपरियन बस्ती का भूभाग मिला हुआ है। ग्राम पंचायत मसौरा का कुछ हिस्सा वार्ड नंबर तेइस में आ गया है। ग्राम पंचायत जुगपुरा का अधिकांश हिस्सा वार्ड नंबर आठ जुगपुरा में आ गया है। इससे ग्राम पंचायत जुगपुरा का अस्तित्व खतरे में आ गया है। वार्ड नंबर छह रामनगर में भी कुछ हिस्सा गांव का शामिल हुआ है।
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नगर पालिका परिषद द्वारा सीमा विस्तार में ग्राम पंचायतों से मिली भूमि का ब्योरा तैयार करते हुए सीमांकन तय कर लिया है। वर्तमान में तहसील के लेखपाल और कानूनगो चुनाव संबंधी कार्यो में व्यस्त हैं, जिस कारण नापजोख की प्रक्रिया में देरी हो रही है। चुनाव संपन्न होने के बाद काम में तेजी आएगी।
- डॉ. संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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