11 दिनों में लग चुकी है 56 जगहों पर आग
ललितपुर। आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। एक अप्रैल से अब तक 11 दिन हुए हैं और 56 स्थानों पर आग लगने से फसलों की तबाही हो चुकी है। फसल का कितना नुकसान हुआ, यह तो नहीं बताया जा सकता। लेकिन, जिन किसानों के खेतों में आग लगी, वह तो बरबाद हो ही गए।
एक मार्च से 30 जून तक आग का सीजन माना जाता है। इस सीजन में आग लगने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। जिले में आग से निपटने के लिए संसाधनों की कमी होने के कारण दूरदराज के क्षेत्र में आग लगने पर भारी नुकसान उठाना होता है। आग लगने की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन आग बुझाने के संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। पिछले साल पूरे सीजन में 159 स्थानों पर आग लगी थी। आग की घटनाओं से निपटने के लिए एसपी ने जिले में दो फायर सब स्टेशन और चार तहसीलों के लिए फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों व स्टाफ की मांग के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। जिले में पांच तहसीलें हैं और आग की घटनाओं से निपटने के लिए तीन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां उपलब्ध हैं, जिनमें मुख्यालय पर दो बड़े वाहन और महरौनी में एक छोटी गाड़ी उपलब्ध है। अप्रैल में गेहूं फसल पक कर तैयार होने के बाद कटाई का काम खेतों में चल रहा है। फसल सूखी होने और गर्मी में आग की एक चिंगारी भी पूूरी फसल स्वाहा करने के लिए काफी है। यही कारण है कि खेतों में छोटी सी चिंगारी खड़ी फसलों या कटी रखी फसलों को बर्बाद कर दे रही है।
एक अप्रैल से अब तक 11 दिनों में अलग-अलग तहसीलों के 56 स्थानों पर आग की घटनाएं हो चुुकी हैं। इनमें किसानों को भारी क्षति हुई है। इनमें मुख्यालय से दूरस्थ स्थानों पर आग लगने की जानकारी के बाद आग वाले स्थानों पर पहुंचने में ही फायर ब्रिगेड के वाहन को एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है, जिससे आसपास के खेत या अन्य प्रतिष्ठानों पर आग का तांडव शुरू हो जाता है। जब तक फायर ब्रिगेड का वाहन पहुंचता है, तब तक क्षेत्र में आग से भारी नुकसान हो जाता है।
इन परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यापारियों व अन्य संगठनों की मांग पर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा मुख्यालय के अलावा महरौनी, मड़ावरा, तालबेह और पाली तहसीलों में फायर स्टेशनों के निर्माण के लिए प्रमुख सचिव से पत्राचार किया गया। लेकिन, अब तक कोई हल नहीं खोजा जा सका है। हालांकि, फायर सब स्टेशनों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन का कार्य भी किया जा सका है, लेकिन जनहित से जुड़ा यह कार्य फाइलों में ही अटका है।
यहां हुईं आग की घटनाएं
ग्राम मसौरा, मिर्चवारा के मौजा पड़ौरिया में ग्रामवासी लखपत पटेल, मुंकुदा, रामभरत, कमल के खेतों में बिजली के हाइटेंशन तारों से निकली चिंगारियों से आग लग गई थी। महरौनी केे ग्राम सिलावन में खेतों में आग की घटना हो चुकी है। शहर के मोहल्ला गोविंद नगर में एक मकान में आग लग चुकी है। आग में एक मुस्लिम परिवार में लड़की की शादी के लिए जमा किए हजारों की नकदी और अन्य सामान जल गया था। चार दिन पूर्व ही ग्राम जीरोन के आगे आल्हापुर क्षेत्र में एक ट्रैक्टर- ट्रॉली समेत गेहूं की लाखों की जल गई थी। महरौनरी व मड़ारा में भी दस एकड़ जमीन में आग की घटना से भारी नुकसान झेलना पड़ा था। जबकि, बानपुर के ग्राम ऊमरी एवं अजनौरा में भी 40 एकड़ जमीन में आग लग लग गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था।
हाइटेंशन तारों की चिंगारियां बनी हादसों का कारण
एक अप्रैल से अब तक 56 जगहों में करीब पंद्रह स्थानों पर आग लगने की वजह खेतों के ऊपर से निकले बिजली के तार हैं। महरौनी के मड़ावरा में दस एकड़ जमीन, ग्राम मसौरा के मौजा मिर्चवारा, पड़ौरिया, सिलावन गांव में हाइटेंशन तारों की वजह से आग लगी थी। वहीं, तालबेहट क्षेत्र में बिजली के तारों की चपेट में आने के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
जिले में महरौनी और तालबेहट में एक-एक फायर सब स्टेशन एवं महरौनी, मड़ावरा, तालबेहट एवं पाली ितहसीलों के लिए कुल चार बड़ी फायर बिग्रेड गाड़ियों एवं अन्य स्टाफ के लिए शासन को प्रस्ताव फिर से भेजा गया है। पूर्व में दो सब स्टेशनों के लिए भूमि का आवंटन भी हो चुका है।
- कैप्टन एमएम बेग, पुलिस अधीक्षक
जहां भी आग लगने से कोई नुकसान होता है, उसका सर्वे प्रशासन द्वारा कराने के बाद जो भी आंकलन किया जाता है, उसे बिजली विभाग के माध्यम से दिया जाता है।
- पीआर सिंह, अधीक्षण अभियंता विद्युत