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पीले वस्त्र पहने शेर पर सवार होकर आएगी संक्रांति

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पीले वस्त्र पहने शेर पर सवार होकर आएगी संक्रांति
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आज मध्य रात्रि में सूर्य करेंगे मकर राशि में प्रवेश, कल पवित्र स्नानदान
देवताओं का प्रभात काल है मकर संक्रांति, तिल दान, जाप, स्नान का है महत्व
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इस बार मकर संक्रांति का पर्व कल मंगलवार को श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों के राजा सूर्य वर्ष भर में मेष राशि से लेकर मीन राशि में भ्रमण करते हैं। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार सूर्य 14 जनवरी की मध्य रात्रि में मकर राशि में प्रवेश करेगा। जिसके चलते मंगलवार को पूरे दिनभर पुण्यकाल रहेगा, यानी स्नान, दान का विशेष महत्व इसी दिन का माना जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि कहा जाता है। इस तरह मकर संक्रांति एक प्रकार से देवताओं का प्रभात काल है। इस दिन स्नान, जाप, दान व अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल प्रदान करने वाला होता है। इस वर्ष भगवान सूर्य मकर राशि में सोमवार को यानि 14 जनवरी की मध्य रात्रि में 2.12 बजे प्रवेश करेंगे। धर्म सिंधु के अनुसार सूर्यास्त के बाद मकर संक्रांति लगने के समय से आठ घंटे पूर्व और आठ घंटे बाद तक पुण्यकाल होता है। इसलिए इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर पूरे दिन भर पुण्य काल रहेगा। मकर संक्रांति के दिन स्नान एवं तिल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य भगवान आषाढ़ के महीने में जुलाई में कर्क राशि में प्रवेश करते हैं और छह महीने तक दक्षिणायन मार्ग से अस्ताचल की ओर जाते हैं। इसलिए कर्क राशि से धनु राशि तक दक्षिणायन सूर्य होता है। मकर राशि पर सूर्य के प्रवेश होने पर सूर्य उत्तरायण होते हैं। सनातन धर्म में मकर संक्रांति का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक व भौतिक महत्व है। मकर राशि पर सूर्य के आने पर सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी पर होती हैं। इन दिनों में मनुष्य की शारीरिक शक्ति बौद्घिक शक्ति का विकास होता है। मकर संक्रांति से छह माह तक विशेष पावन मुहूर्त और समय माना जाता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार संक्रांति का शेर की सवारी करते हुए आ रही है। संक्रांति का उपवाहन घोड़ा है। संक्रांति पीले वस्त्र धारण किए हैं और कुमकुम का लेप किए हैं। यह खीर का भक्षण कर रही है और दक्षिण से उत्तर की दिशा की ओर जा रही है और यह ईशान कोण की ओर मुंह किए हैं।
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इन राशियों पर रहेगा असर
इस बार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय अश्विनी नक्षत्र एवं मेष राशि पर चंद्रमा विराजमान है। इसलिए मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, धनु, मीन एवं कुंभ राशि को मकर संक्रांति शुभ मानी गई है। वहीं वृश, कन्या, वृश्चिक, मकर राशि वालों का मकर संक्रांति शुभ नहीं है।
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मकर संक्रांति के दिन नदी, तालाब, कूप या तीर्थ स्थल पर तिल से स्नान करने का विशेष फलदायी होता है। तिल लगाकर स्नान करना, रक्षार्थ चारों दिशा में छोड़ना, तिल का होम लगाना, दल में तिल डालना, तिल का भक्षण करना, तिल दान करना, विशेष पुण्य प्राप्त करने वाला होता है।
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