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पुरानी परंपरा की ताकत का हुनर दिखाएंगे आधुनिक युग के पहलवान

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पुरानी कसरतों का हुनर दिखाएंगे पहलवान
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आजादी से पूूर्व शुरू व्यायामशाला का मनाया जाएगा 78वां वार्षिकोत्सव
कंपनी बाग में हर उम्र के पहलवान करेंगे 25 प्रकार के करतब का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर में सबसे पुरानी व्यायामशाला के 78वें वार्षिकोत्सव में पुरानी कसरत का हुनर आधुनिक युग के पहलवान दिखाएंगे। कंपनी बाग में एक साथ करीब 25 प्रकार के करतबों का प्रदर्शन 250 पहलवान दिखाएंगे। इसमें मलखम का भव्य प्रदर्शन रहेगा। वहीं, तलवारबाजी एवं अन्य हैरतअंगेज प्रदर्शन भी होंगे।
पुराने समय में जगह-जगह अखाड़े व व्यायामशालाएं खोली जाती थीं। शहर में जगदीश मंदिर प्रांगण में वर्ष 1940 में भारत सेवा मंडल व्यायामशाला की स्थापना स्वतंत्रता संग्राम सेनानी काशीनाथ त्रिपाठी ने शुरू की थी। उन्होंने इस व्यायामशाला के माध्यम से युवाओं को पहलवानी के हुनर सिखाए। आजादी के बाद अध्यापक की नौकरी मिलने के बाद उन्होंने जिला छोड़ दिया, लेकिन उनके द्वारा शुरु की गई व्यायामशाला बाद में दादा उमानंद हुंडैत ने वर्ष 1986 तक संभाली और फिर उनके बाद वर्ष 1994 तक मोतीलाल सेन व्यायामशाला का संचालन करते रहे। शहर के कंपनी बाग में 18 नबंवर को उक्त व्यायामशाला का वार्षिकोत्सव भव्यता के साथ मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। इस बार वार्षिकोत्सव में करीब 25 प्रकार की कसरतों का प्रदर्शन करीब 250 पहलवान युवाओं द्वारा दिखाया जाएगा। अब यहां बड़े रूप में आयोजित कार्यक्रम में आधुनिक कलाओं के साथ पुरानी परंपराओं का समावेश भी नजर आएगा, जो पुरानी पहलवानी विधा के साथ आधुनिक मशीनरी के साथ प्रदर्शित की जाएगी। यहां के पहलवानों द्वारा अस्सी के दशक से लेकर अब तक कई बार प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी अपना लोहा मनवा चुके हैं।
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यह आयोजन होंगे मुख्य आकर्षण का केंद्र
मार्गदर्शक मंडल की ओर से बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि व्यायामशाला के उक्त प्रदर्शनों में मुगदर प्रदर्शन, लाठी लड़न्त, पटा, चेनस्टिक, वेट लिफ्टिंग, पावर लिफ्टिंग, होरीजोन्टल बार, तलवार ग्रुप, तलवार लड़ंत, तलवार प्रदर्शन, हजारा, भाला लड़ंत, योग प्रदर्शन, बॉडी शो, बनेठी, वाना पाईप प्रदर्शन, मलखंभ ग्रुप, बोतल मलखंभ, ड्राइविंग बॉक्स, चेयर वैलेन्स, झूला समेत करीब 25 प्रकार के हैरतअंगेज विधाओं का प्रदर्शनों किया जाएगा।
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लाठी-प्रदर्शन की भी कई विधाएं दिखाएंगी अपना हुनर
वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में वैसे तो सभी प्रकार की पहलवानी के प्रदर्शन रोचक रहेंगे, लेकिन पुरानी परंपरा की झलक लाठी और तलवार एवं मलखंभ प्रदर्शन में खासकर देखने को मिलेगी। इनमें तलवार के दो रूपी प्रदर्शन में दो दुश्मनों से बचाव का तरीका अपनाया जाता है। वहीं, तलवार वंचिका के अलावा तलवार के गर्दन उड्डान प्रदर्शन में दुश्मनों से गर्दन बचाव का तरीका है। जबकि गर्दन जनेबा के प्रदर्शन में तलवार का उपयोग गर्दन व शरीर के मध्य भाग बचाने व काटने के तरीके का प्रदर्शन किया जाता है। वहीं लाठी के प्रदर्शन में लाठी रणमार, लाठी जंगप्रहार, लाठी डेलिया, लाठी चक्रबेल की विधाओं का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा।
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