ट्रीटमेंट प्लांट के लिए डेढ़ एकड़ जमीन अधिकृत
नेहरू नगर पुनर्गठन अमृत पेयजल योजना
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
नेहरू नगर पुनर्गठन अमृत पेयजल योजना में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की लिए जमीन की कमी रास्ते का रोड़ा बन रही थी, जिसे दूर कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने इसके लिए ग्राम सभा की करीब डेढ़ एकड़ जमीन को अधिकृत कर लिया है। वहीं, नेहरू नगर पेयजल योजना के लिए अभी गोविंद सागर बांध से पानी लेने की अनुमति पर शासन की मंजूरी मिलना और खाते में बजट आना बाकी रह गया है।
भारत सरकार द्वारा संचालित अमृत योजना के तहत विगत वित्तीय वर्ष में स्वीकृत हुई 39.50 करोड़ लागत की नेहरू नगर पुनर्गठित अमृत पेयजल के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और अवर जलाशय के निर्माण के लिए जमीन की तलाश पूरी हो चुकी है। हाल ही में जिला प्रशासन ने ग्राम सिवनी खुर्द में स्थित ग्रामसभा की करीब 0.607 हेक्टेअर यानी लगभग डेढ़ एकड़ बंजर जमीन अधिकृत कर ली है। यह जमीन विगत वर्ष हुए सीमा विस्तार के बाद नगर पालिका की सीमा में आ गई है, लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों में अभी भी यह जमीन ग्रामसभा के ही अभिलेखों में दर्ज है। गौरतलब है कि इस नेहरू नगर पुनर्गठन अमृत पेयजल योजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन नहीं होने व गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लेने की अनुमति मिले बिना ही जिला प्रशासन ने विगत माह 12 अप्रैल को प्रशासन ने जनपद आए मुख्यमंत्री योगी से इस योजना का शिलान्यास करा दिया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी और काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। जब जिला प्रशासन ने जीमन अधीकृत करके अपनी आधी किरकिरी बचा ली है, लेकिन अभी भी गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लेने की अनुमति मिलना अभी बाकी है। बिना पानी के पेयजल योजना सपना देखने के ही बराबर है। बता दें कि इस अमृत पेजयल योजना के तहत गोविंद सागर बांध से कच्चा पानी लेकर ट्रीटमेंट प्लांट में फिल्टर किया जाएगा और बाद नेहरू नगर क्षेत्र के तीनों वार्ड, चांदपारी व सदनशाह क्षेत्र में जलापूर्ति की जाएगी। गौरतलब है कि इस पेयजल योजना को वर्ष 2016-17 में अमृत योजना के तहत नगर पालिका द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर स्वीकृति मिली थी। इसके बाद सर्वप्रथम जल संस्थान द्वारा डीपीआर तैयार की गई फिर शासन की मांग पर जल निगम ने डीपीआर तैयार की। करीब 13 करोड़ की लागत से शुरू हुई इस पेयजल योजना की लागत करीब 23 करोड़ तक पहुंच गई थी। दिसंबर 2016 में इसका टेंडर भी कर दिया गया था, लेकिन पूरा साल बीतने के बाद भी शासन द्वारा बजट जारी नहीं किया गया था। इसके बाद अब इस योजना का पुर्नगठन किया गया है।
इस मामले में सिंचाई विभाग राजघाट निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता और जल निगम निर्माण खंड इकाई के परियोजना अधिकारी प्रवीण कुमार कुट्टी दोनों का ही यही कहना है कि पानी की अनुमति के लिए जनपद स्तर से प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है, जल्द ही शासन से भी अनुमति मिल जाएगी।