इंचार्ज के सहारे चल रहा जिला महिला चिकित्सालय
ललितपुर।
स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी स्थान प्राप्त करने वाला जिला महिला चिकित्सालय पिछले पांच सालों से इंचार्ज के सहारे संचालित हो रहा है। वर्तमान में मुख्य चिकित्सालय अधीक्षिका सहित करीब 28 विभिन्न प्रकार के पद रिक्त बने हुए हैं। उसने समूची स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ नहीं है। यहां विशेषज्ञ और बेहतर अस्पताल नहीं है। यहां के बाशिंदों को इकलौते सरकारी महिला चिकित्सालय पर निर्भर रहना पड़ता है। इस अस्पताल ने भले ही प्रदेश में अग्रणी स्थान पा लिए हो, लेकिन अस्पताल में सीएमएस सहित दो दर्जन पद खाली चल रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने के लिए काफी हैं। विभागीय पद सृजन पर गौर करें तो करीब पांच वर्षों से चिकित्सालय में अधीक्षिका का पद रिक्त बना हुआ है। इसके अलावा सृजित 54 में से 26 पद ही भरे हैं, वहीं 28 पद रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ परामर्शदाता विशेषज्ञ के सृजित दो पदों के सापेक्ष एक पद भरा हुआ है। वहीं, रेडियोलोजिस्ट, पैथोलोजिस्ट व निश्चेतना विशेषज्ञ के पद रिक्त चल रहे हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के तीन में से एक पद भरा हुआ है, जबकि दो पद रिक्त हैं। ईएमओ के चार पदों में से दो पद रिक्त हैं। सिस्टर के पांच पदों में से चार पद रिक्त हैं। उपचारिका के नौ पदों के सापेक्ष छह पद रिक्त बने हुए हैं। चीफ फार्मेसिस्ट के दोनों ही पद रिक्त चल रहे हैं। सफाई कर्मचारी के दो पदों में से एक पद रिक्त है। धोबी का इकलौता पद रिक्त है। वहीं, प्रसवोत्तर केंद्र में 10 पदों में से छह भरे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी का एक पद रिक्त चल रहा है। स्टाफ नर्स के दो पदों में से एक पद रिक्त है। कनिष्ठ सहायक व वार्ड आया का पद रिक्त पड़े हुए हैं।
कई बार कर चुके शासन को पत्राचार
अस्पताल में अधिकारी, कर्मचारियों के पद खाली हैं। इसे लेकर शासन को कई बार पत्र लिख चुके हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय विधायकों ने भी इस ओर ध्यानाकर्षित कराया है।
- डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान
प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला चिकित्सालय