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शिक्षकों को रास नहीं आए विद्यालयों के विकल्प, नहीं हो सकी काउंसलिंग

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शिक्षकों को रास नहीं आए विद्यालयों के विकल्प, नहीं हो सकी काउंसलिंग
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दूरदराज के विद्यालयों में जाने महिला शिक्षकों को सता रहा सुरक्षा का भय
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। स्थानांतरण होकर जनपद में आए शिक्षकों की विद्यालयों में तैनाती के लिए काउंसलिंग आयोजित की गई थी। इसमें जनपद के केवल दूरदराज के बंद व एकल विद्यालयों के विकल्प खोले जाने के कारण शिक्षकों को काफी नाराजगी रही और देर शाम तक शिक्षक व अधिकारी अपनी जिद पर अड़े रहे, जिससे काउंसलिंग नहीं हो सकी। वहीं, तेज गर्मी व पूरे दिन इंतजार करते-करते एक महिला शिक्षिका बेहोश भी हो गई, जिसका जिला अस्पताल में उपचार कराया गया।
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण लेकर 19 शिक्षक जनपद में स्थानांतरण लेकर आए हैं, इनमें केवल 01 ही शिक्षक पुरुष है, बाकी 18 महिला शिक्षिकाएं हैं। शासनादेश के अनुसार तो 07 जुलाई तक इन शिक्षकों की विद्यालय में तैनाती कर देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सोमवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम के नेतृत्व में काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित की गई, लेकिन सुबह से लेकर देर शाम तक किसी भी शिक्षक ने विद्यालय का विकल्प नहीं भरा। शिक्षकों व शिक्षक नेताओं द्वारा काफी विरोध के कारण काउंसलिंग नहीं हो सकी। दरअसल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 19 शिक्षकों को विकल्प के लिए केवल 19 विद्यालय ही खोले गए थे, इसमें अधिकाशं विद्यालय दूर-दराज के बंद और एकल विद्यालय थे। इसमें जनपद के सबसे दूर-दराज के लखंजर और कुरट गांव के विद्यालयों को भी शामिल किया गया था। शिक्षा विभाग जहां इन विद्यालयों में अभी तक किसी पुरुष शिक्षक को नहीं भेज पाया है, वहां महिला शिक्षक को भेजकर बंद विद्यालय को खेले जाने की मंशा बनाए हुए है। यदि शिक्षक विकल्प भरते तो अंत के शिक्षकों को अन्य विकल्प नहीं होने के कारण महिला शिक्षिकाओं को मजबूरन इन दूर-दराज के विद्यालय का विकल्प भरना होता। शिक्षकों ने इसी समस्या हो देखते हुए काउंसलिंग का विरोध किया और इसके साथ ही नियमानुसार शिक्षकों की संख्या के तीन गुना विद्यालय के विकल्प खोले जाने की मांग की गई। सुबह से लेकर शाम तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नहीं पसीजे और वहीं शिक्षक भी अपनी सुरक्षा के मद्देनजर अपनी मांग पर डटे रहे। इस दौरान जनपद के शिक्षक संगठनों उत्तर प्रदेश उच्च प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और महिला शिक्षिकाओं की मांग को सहीं देखते हुए उनका समर्थन किया। सभी शैक्षिक नेताओं ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से विकल्प के लिए अन्य विद्यालयों को खोले जाने की मांग की है। वहीं सुबह से कई घंटों तक काउंसलिंग का इंतजार करते-करते तेज गर्मी व भूख के कारण एक महिला शिक्षिका संयोगिता गुप्ता बेहोश हो गई थी। उनका जिला अस्पताल में उपचार कराया गया।
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आगामी खेल के लिए बताए जाते नियम व शासनादेश
ऐसा केवल इसी बार नहीं हो रहा है, ऐसा हर वर्ष होता है। अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में बंद व एकल विद्यालयों को खोले जाने के शासनादेश का हवाला देते हुए शिक्षकों को दूर-दराज के विद्यालयों का विकल्प दिया जाता है और उन्हें वहां भेजा भी जाता है। इसके बाद जब समायोजन का समय आता है, तो फिर महिलाओं की सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय के समीप विद्यालय में तैनाती कराने व अन्य शासनादेशों का हवाला देते हुए उनका समायोजना नजदीकी विद्यालय में कर दिया जाता है। यह पूरी सोची समझी साजिश होती है और इसमें अधिकारियों व शिक्षा विभाग के दलालों की अच्छी खासी कमाई भी हो जाती है। इससे पहले भी इन दूरदराज के बंद विद्यालयों लखंजर, कुर्रट आदि में शिक्षकों की तैनाती की गई है, लेकिन समायोजन के बाद यह फिर बंद हो जाते हैं।
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19 विद्यालयों में ही चुनना होगा विकल्प
इन्हीं 19 विद्यालयों में से शिक्षकों को विकल्प चुनना होगा। शासन की मंशा के अनुरुप इन बंद विद्यालयों का खुलवाना मेरी प्राथमिकता है। काउंसलिंग की अगली तारीक अभी निर्धारित नहीं है, लेकिन जल्द ही निर्धारित कर सूचित कर दिया जाएगा।
- मायाराम, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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