विपक्षियों के विरोध एवं जातीय समीकरण से हुआ नुकसान
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में नगर निकाय चुनावों की समीक्षा हुई। इस दौरान पाया कि नगर पालिका एवं नगर पंचायत चुनाव में जातीय समीकरण हावी रहे तो विपक्षी उम्मीदवारों का विरोध पार्टी उम्मीदवार के लिए भारी पड़ा। जिस वजह से नगर पंचायतों में उन्हें हार मिली।
चुनाव उपरांत अब लगभग सभी पार्टियां समीक्षा कर रही हैं। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक हुई। इसमें नगर पालिका व नगर पंचायतवार समीक्षा की गई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में चर्चा हुई कि जातिगत समीकरणों में वोटर उलझे हुए थे। नगर पालिका परिषद के चुनाव में सपा उम्मीदवार संध्या सुड़ेले व आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार रेखा पटैरिया रिश्तेदार एवं व्यवहारियों का ही वोट पा सके जबकि ब्राह्मणों का अधिकांश वोट पार्टी को मिला है। पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा की पत्नी कमला देवी के मैदान में रहने से कुशवाहा बिरादिरी का वोट कटा है। इसी तरह जैन समाज के दो उम्मीदवार होने से इस समाज का भी वोट पार्टी के लिए कम ही मिला है। पार्टी को हर बूथ पर वोट मिलने से जीत मिली है। महरौनी नगर पंचायत चुनाव में बड़ौनिया परिवार का विरोध देखा गया। वहीं, पार्टी का चुनाव नहीं उठने से जैन सहित कई समाजों का वोट एकजुट होकर निर्दलीय उम्मीदवार कृष्णा सिंह के पक्ष में चला गया। तालबेहट नगर पंचायत में पार्टी का बागी उम्मीदवार होने से अधिकृत प्रत्याशी को नुकसान हुआ। यहां का उम्मीदवार ब्राह्मण वोट न के बराबर ही पा सका। पाली नगर पंचायत में विक्रम सिंह का विरोध होने के चलते चौरसिया समाज लामबंद हो गया और उसने रामकुमार के पक्ष में मतदान कर दिया। इस कारण पार्टी के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश कुमार सिंह एडवोकेट का कहना है कि नगर पालिका परिषद के चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ा है। मतदान के उपरांत सोलह से अठारह हजार वोट मिलने की उम्मीद थी जो उम्मीदवार को मिला है। चुनाव के दौरान कुछ नेताओं को पहले ही बाहर का रास्ता दिखा जा चुका है। अब कुछ और चिह्नित हुए हैं। बुधवार को कानपुर में क्षेत्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में चुनावी समीक्षा होने जा रही है। इसमें सभी पहलुओं को रखा जाएगा। बैठक में जो निर्देश मिलते हैं, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।