सड़कें न जल निकास, यह कैसा विकास
ललितपुर।
लगभग एक दशक पहले मुहल्ला तालाबपुरा में बनी विदुआ कालोनी आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी झेल रही है। यहां की सड़कें न तो पक्की हो पाई हैं और न ही जल निकासी बन पाई है। यही नहीं, पाइप पेयजल आपूर्ति भी चरमराई हुई है। इस स्थिति में यहां के बाशिंदे खुद को छला सा महसूस कर रहे हैं।
शहर में करीब एक दर्जन कालोनियों का निर्माण हो चुका है। इसमें से अधिकांश कालोनियों में बुनियादी सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया है। कालोनाइजर ने लुभावने वायदे करते हुए मनमाने तरीके से लोगों को प्लॉट बेच दिए हैं। विदुआ कालोनी भी इन्हीं में से एक है। यहां करीब एक सैकड़ा परिवारों ने छोटे-बड़े प्लॉट खरीदे हैं। जिस समय प्लॉटों की खरीद-फरोख्त हुई उस दौरान कालोनाइजरों ने बिजली के पोल और कुछ जगहों पर पेवर ब्रिक्स डाल दिए थे। जो अब जगह-जगह उखड़े पड़े हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले पाइप लाइन बिछाते समय पेबर ब्रिक्स निकाले गए। इस दौरान जो पेबर ब्रिक्स रह गए थे, वह अंडर ग्राउंड बिजली की लाइन डालते समय उखड़ गए। इस तरह जहां नजर जाती है, वहां पेबर ब्रिक्स बिखरे दिखते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मकान बनवाने के इच्छुक लोगों ने कालोनाइजरों के झांसे में आकर ऊंचे दामों पर प्लॉट खरीद लिए। इसके उपरांत मेहनत की गाढ़ी कमाई खरीदे प्लॉटों पर लगा दी। इस तरह अपने सपनों के घर का निर्माण कर लिया। कालोनी में एक से बढ़कर मकान दिखाई देते हैं। यदि कोई कमी खलती है तो वह बुनियादी सुविधाओं का अभाव। वर्षो बाद भी कालोनी सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं से लैस नहीं हो पाई है। इस गली से होकर दूसरी गली में जाए तो जगह-जगह सड़कें व नाली कच्ची दिखाई देती हैं। नाली का गंदा पानी यहां-वहां बह रहा है। वर्तमान में कई जगहों पर तो बारिश का पानी सड़कों पर भर गया है। यही नहीं, खाली प्लॉटों में बारिश व नाली का गंदा पानी जमा हो रहा है। कई प्लॉट ऐसे हैं जिनमें गोबर डंप हो रहा है तो कई प्लॉटों में बालू व ईटों का कारोबार हो रहा है। ऐसे में कालोनीवासी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
बारिश के दिनों में होती है परेशानी
वर्ष 2015 में जब कालोनी में रहने के लिए आए तो तब यहां कुछ ही मकान बने थे। इन दो सालों में कालोनी का विकास न के बराबर हुआ है। यहां कुछ ही जगहों पर मार्ग प्रकाश व्यवस्था है। अधिकांश गलियों में अंधेरा पसरा रहता है। कच्ची सड़कें बारिश के दिनों में बड़ी अखरती हैं। इसके अलावा आज तक कालोनी के मकानों के नंबर आवंटित हो सके हैं जबकि यहां सर्वे कराए जाने की बात हुई थी। विभागीय अफसरों के नजरअंदाज करने से समस्याएं कम नहीं हो रही हैं।
शालिकराम शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक
पेयजल की किल्लत
पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन डाली गई है। लेकिन, आए दिन जलापूर्ति बाधित बनी रहती है। मजबूरन, लोगों को मकानों में बोरिंग कराना पड़ रही है। जहां तक साफ-सफाई की बात है तो भूले भटके ही सफाई कर्मी कालोनी में आते हैं। नालियों का हाल किसी से छिपा नहीं है। खाली प्लॉटों में जमा हो रही गंदगी मौसमी बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। स्थानीय पार्षदों से कालोनी के विकास के लिए कहा लेकिन कालोनी में बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति नहीं हो सकी है, जिससे कालोनी वासियों को अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ताराचंद जैन, दुकानदार
अपना स्वामित्व बताएं कालोनी वासी
कालोनी वासी अपना स्वामित्व बताएं, उसके आधार पर उनका नाम दर्ज किया जाएगा। अधूरे विकास के लिए कालोनीनाइजर जिम्मेदार हैं।
अनिल कुमार अरुण, प्रभारी अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।