फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जांच रिपोर्ट आने से पहले की कर दिया अधीक्षक का स्थानांतरण, स्टाफ भड़का

विज्ञापन
विज्ञापन
जांच रिपोर्ट आने से पहले ही सीएमएस का स्थानांतरण
विज्ञापन

ललितपुर।
स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने और चिकित्सा अधीक्षक का स्थानांतरण कर देने के विरोध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार के कर्मचारियों ने स्वास्थ्य केंद्र पर तालाबंदी कर दी है तथा सोमवार से धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। सीएमओ ने जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर ही अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया है और नर्स का बचाव किया जा रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार में स्टाफ और नर्स के बीच चल रहा विवाद और अधिक भड़क गया है। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही अधीक्षक डॉ. ध्रुव कुमार का स्थानांतरण महरौनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर दिया है। इसी वजह से आक्रोशित कर्मचारियों ने सोमवार से हड़ताल व धरना-प्रदर्शन करने और स्वास्थ्य केंद्र पर ताला बंदी करने का बात कही है। गौरतलब है कि स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक समेत समस्त स्टाफ कर्मचारियों ने स्थानीय स्टाफ नर्स पर आरोप लगाया था कि नर्स ने अपने पति, जो नेत्र सहायक के पद और बहन, जो एएनएम पद पर तैनात हैं, से मिलकर 11 सितंबर की सुबह करीब साढ़े 10 बजे अधीक्षक डा. ध्रुव कुमार समेत अन्य कर्मचारियों के साथ अभद्रता व गालीगलौज कर मारपीट की घटना को अंजाम दिया था। इसके अलावा भी उक्त नर्स पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, सुविधा शुल्क लेने व वित्तीय अनियमितताओं समेत अन्य आरोप लगाए थे। यह मामला जिला मुख्यालय पर सीएमओ समेत डीएम व थाने तक पहुंचा। इसके बाद डीएम मानवेंद्र सिंह के निर्देशन पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रताप सिंह ने तीन वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की जांच टीम गठित की थी। इस जांच टीम में शामिल डॉ. डीसी दोहरे, डॉ. मुकेशचंद्र दुबे और डॉ. जेएस वक्शी ने शुक्रवार को स्वास्थ्य केेंद्र बार पहुंचकर समस्त स्टाफ कर्मियों की अलग-अलग गवाही नोट की और मामले की जांच की थी। जांच टीम के द्वारा अभी तक जांच रिपोर्ट पेश भी नहीं की गई है और सीएमओ ने बिना कोई जांच के अधीक्षक का स्थानांतरण महरौनी स्वास्थ्य केंद्र कर दिया है, जबकि स्टाफ नर्स व उसका परिवार वर्तमान में भी वहीं तैनात है। इसी बात से क्षुब्ध होकर समस्त कर्मचारियों ने यह निर्णय लिया है। तालाबंदी की बात कहने वालों में एलटी प्रहलाद भारती, आलोक त्रिपाठी, केतन सिंह यादव, ओमप्रकाश राजपूत, रीना गुप्ता आदि शामिल है। इनकी मांग है कि उक्त नर्स की संविदा सेवा समाप्त की जाए।
विज्ञापन


पूरा स्टाफ है नर्स के खिलाफ, केवल अधिकारी कर रहे बचाव
आरोप है कि इसी नर्स ने विगत रोज फर्जी तरीके से एक व्यक्ति के दो पुत्रों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, जबकि उक्त बच्चों को जन्म भी इस अस्पताल में नहीं हुआ था। इसी मामले में अधीक्षक ने नर्स से स्पष्टीकरण मांगा था। इसके अलावा पिछले साल अगस्त में भी इसी नर्स ने एक कारनामा किया था। इस दौरान तीन मामले सामने आए थे, जिसमें घरों पर होने वाले प्रसव को स्वास्थ्य केंद्र पर होना दर्शाकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया। इसमें वित्तीय अनियमितताओं केे मद्देनजर मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन डीएम डॉ. रुपेश कुमार ने दो वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की जांच कराने के निर्देश दिए थे, जो वर्तमान में ठंडे बस्ते में है। इसके अलावा स्टाफ नर्स में हमेशा से ही सुविधा शुल्क लेने व तीमारदारों से अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं। उक्त गंभीर मामलों में नर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सीएमओ ने इन मामलों में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
विज्ञापन


बार अधीक्षक का स्थानांतरण सामान्य तौर पर किया गया है, यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है। अभी जांच टीम की रिपोर्ट नहीं आई है, यदि जांच में नर्स आरोपी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ललितपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें