ललितपुर। कोविड 19 महामारी के कारण लॉकडाउन होने से जिले में अभी तक 10,981 लोग विभिन्न महानगरों से वापस आ चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से उन्हें रोजगार देने की चुनौती खड़ी हो गई है। ग्राम पंचायतों में तो मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने की कोशिश हो रही है, लेकिन शहर में रुके लोगों को रोजगार देना सवाल बनकर रह गया है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए देश लॉकडाउन है। इस समय लॉकडाउन का तृतीय चरण चल रहा है। पहले लॉकडाउन से लेकर अभी तक जिले में 10,981 लोग काम के अभाव में वापस घरों को लौटे हैं। वहीं, जनपद में रह रहे 1,463 लोग भी अपने घरों को वापस आ गए हैं। जो श्रमिक जनपद में वापस आए हैं, उनके लिए रोजगार उपलब्ध कराना चुनौती बन गया है।
11 मई तक विभिन्न ग्राम पंचायतों में बाहर से आए 5,338 लोगों को ही रोजगार मुहैया कराया जा सका है, बाकी श्रमिकों के लिए अभी भी रोजगार की तलाश है। मनरेगा के आंकड़ों के अनुसार, इस समय जिले में 1241 तालाब, बंधी और समतलीकरण के कार्य कराए जा रहे हैं, जिनमें 29,168 श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है। जो लोग शहरी क्षेत्रों में रुककर रह गए हैं, उनके लिए रोजगार मिलना कठिन हो गया है। वर्तमान में निकाय स्तर पर न के बराबर काम चल रहे हैं। इससे रोजगार की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।
क्वारंटीन के बाद पहुंचे घर
बाहरी राज्य/महानगरों से आए श्रमिकों को क्वारंटीन किया गया है। इसमें 2,562 लोगों को शेल्टर होम में रखा गया। जिन लोगों ने क्वारंटीन की समयावधि पूरी कर ली है, उन्हें उनके घर भेजा गया है।
मेल नहीं खा रहे विभागों के आंकड़े
जिला प्रशासन के अनुसार जिले में 10,981 लोग बाहरी नगरों से आए हैं। वहीं, विकास विभाग के मुताबिक ग्राम स्तर पर सर्वे कराया गया, जिसमें 8,753 श्रमिकों के आने की पुष्टि हुई। इनमें 5,338 श्रमिकों को मनरेगा में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उधर, जिला पंचायत राज विभाग के कागजों में दर्ज आंकड़ों में 7,500 लोग ही जनपद में बाहर से आए हैं। इस तरह आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
लॉकडाउन से अभी तक जिले में 10,981 लोग बाहर से आ चुके हैं और जो 1,463 लोग रह रहे थे, वे वापस घर चले गए हैं। बाहर से आने वाले लोगों को क्वारंटीन कर वापबस घर भेजा जा रहा है।
- लवकुश त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी न्यायिक